वरिष्ठ फिल्म पत्रकार रामकृष्ण का गुरुवार सुबह निधन हो गया। सेहत खराब होने की वजह से वह तीन दिन से मेडिकल कॉलेज के गांधी वार्ड में एडमिट थे। शाम चार बजे भैसाकुंड में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
लेखक और पत्रकार के तौर पर पहचान रखने वाले रामकृष्ण का जन्म 1927 में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने स्नातकोत्तर किया था।
पत्रकारिता जगत में कदम रखने के बाद वे उस वक्त के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ‘नेशनल हेराल्ड’, ‘द लीडर’, ‘द पायनियर’ में लिखते रहे।
अंतिम समय तक ‘अमर उजाला’ में नियमित रूप से उनका कॉलम प्रकाशित होता रहा। उनकी लगभग बीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
जिनमें ‘अपना राज अपने आदमी’, ‘केले के खंभे’, ‘बेलगाम घोडे़’, ‘शैलेंद्र: मेरा दोस्त, मेरा दुश्मन’, ‘कवि संत रामतीर्थ’, ‘भारतीय नवोदय के अग्रदूत’, ‘उपलब्धि’, ‘प्रतीक्षा’ आदि खासतौर से पाठकों द्वारा सराही गई।
जबकि उनकी एक कृति ‘फिल्मी जगत में अर्धशती का रोमांच’ को राष्ट्रपति द्वारा स्वर्ण कमल पदक से सम्मानित किया गया।
गुरुवार शाम को ही भैसाकुंड घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनको मुखाग्नि उनकी पत्नी संतोष ने दी। शहर की कई जानी-मानी हस्तियों ने उनको भावभीनी श्रृद्धांजलि दी।
पत्नी संतोष के मुताबिक सोमवार शाम चार बजे मारवाड़ी वाली गली स्थित उनके निवास स्थान पर शांति हवन होगा।