कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि पूर्व मंत्री की बीमारियों का इलाज कारागार में कैसे हो सकता है, जबकि वहां पर विशेषज्ञ चिकित्सक का पद ही नहीं है। कोरोना महामारी इस समय अपना विकराल रूप में है। उसके प्रभाव से जेल भी नहीं बचा है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री को संक्रमित मरीजों से दूर रखने का निर्देश दिया था। ऐसे हालात में केजीएमयू व वरिष्ठ अधीक्षक जिला कारागार हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करना सुनिश्चित करें।