पीड़िता के पिता की मौत से सरकार बैकफुट पर आ गई और पुलिस ने सेंगर के भाई को गिरफ्तार कर लिया। रातोरात जांच सीबीआई को स्थानांतरित की गई और जांच शुरू होने तक मामले की पड़ताल के लिए एसआईटी का गठन किया गया।
एसआईटी हरकत में आती इससे पहले ही सीबीआई ने दो घंटे में दुष्कर्म और दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जिस विधायक को उसके रसूख के चलते यूपी पुलिस बचा रही थी, उसी सेंगर को सीबीआई ने चंद घंटों में ही गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने उन्नाव के माखी थाने के कई पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इन पुलिस कर्मियों पर दुष्कर्म पीड़िता के पिता को झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप था।
इसमें थाने के एसएचओ और कई अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे। यानी 20 महीने में ही सीबीआई ने कुलदीप के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पूरे साक्ष्य एकत्र किए और न्यायालय में पैरवी की, जिससे कुलदीप की तमाम दलीलें नाकाम साबित हुईं और उसे न्यायालय ने दोषी माना।