लखनऊ। गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे सीएम युवा कॉन्क्लेव एवं एक्सपो के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते युवाओं की भीड़ उमड़ी रही। एक्सपो स्थल नवाचार, उद्यम और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया।
प्रदर्शनी में लगे स्टॉल्स पर युवाओं ने विभिन्न मशीनों की कीमत, कामकाज और उपयोगिता की बारीक जानकारी जुटाई। किसी ने ड्रोन, ऑटोमेटिक राइस प्लांट व चलते-फिरते रेस्टोरेंट में रुचि दिखाई, तो किसी ने पिज्जा, बर्गर या सोया चाप बनाने वाली मशीनों के कामकाज को समझा। कई स्टॉल्स पर घरेलू उत्पाद जैसे हर्बल मिठाइयों, मखाने, तिल व गुड़ से बने लड्डुओं की भी मांग रही।
आटा चक्की से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार
बस्ती निवासी अनिल कुमार ने बताया कि उनके पिता घर में आटा चक्की चलाते थे। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने दिल्ली में कई कंपनियों में मशीनों पर काम सीखकर खुद मशीनें बनानी शुरू कीं। इनमें आटा चक्की, राइसमिल, पैकिंग, रसगुल्ला, लड्डू, चप्पल, अगरबत्ती, रोटी बनाने की मशीनें हैं। आज उनके पास 2,500 रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की मशीनें हैं और वे 400 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनका टर्नओवर करोड़ों में पहुंच चुका है।
जरूरत ने बनाया मशीन इनोवेटर
कानपुर के गौरव तिवारी ने बताया कि कारीगरों की चालबाजियों से परेशान होकर उन्होंने खुद मशीन बनानी शुरू की। बेकरी और होटल क्षेत्र की करीब 200 मशीनें अब वे खुद डिजाइन कर रहे हैं। कानपुर के अलावा लखनऊ में भी उनका उनका ऑफिस व स्टोर है। आसपास के जिलों ही नहीं दूसरे प्रदेश तक डिमांड पर मशीनें भेजते हैं। हजारों से शुरू किया काम 10 सालों में करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
आपदा को बनाया अवसर
लखनऊ के विकल्प खंड की कुसुम श्रीवास्तव के पति की नौकरी कोरोना काल में छूट गई। ऐसे समय में उन्होंने तिल, मेवा और देशी घी से बने लड्डू का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए सीएम उद्योग योजना के तहत दो लाख का ऋण लिया। देशी घी, गुड़ समेत विभिन्न मोटे अनाज से तैयार उनका लड्डू 600 रुपये से लेकर 1400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। 2000 रुपये की लागत शुरू इस व्यापार से वह महीने में लाखों रुपये कमा रहीं हैं। अब वे अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार दे रही हैं। व्यवसाय में उनकी 90 वर्षीय सास सुशीला श्रीवास्तव ने काफी सहयोग किया।