लखनऊ। शहर में सकट चौथ का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दिन महिलाओं ने संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा। शाम को चंद्र दर्शन कर भगवान गणेश की पूजा की और व्रत का पारण करते हुए तिलकुट का प्रसाद वितरित किया। शहर के अलग- अलग हिस्सों में महिलाओं ने एकजुट होकर सकट चौथ के महत्व और परंपरा से जुड़ीं कथाएं सुनाईं। मंदिरों में भी इस दौरान पूजा-पाठ हुए। श्रद्धालुओं को आटा, गुड़ व तिल से बने लड्डुओं का प्रसाद बांटा गया। ।
भगवान का प्रिय प्रसाद है लड्डू
सकट पर्व के बारे में जियामऊ की रहने वाली ऊषा यादव ने बताया कि हर साल वह व्रत रखतीं हैं और यह परंपरा पीढि़यों से चली आ रही है। हर साल वह तिल और गुड़ के लड्डू बनातीं हैं। उन्होंने बताया कि कहना है कि लड्डू न सिर्फ भगवान का प्रिय प्रसाद है, बल्कि सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी हैं। वहीं, हजरतगंज की अंजलि बताती हैं कि इस वर्ष संतान प्राप्ति के लिए सकट चौथ का व्रत रखा और मंदिर के बाहर जरूरतमंदों को तिलकुट एवं अन्य सामग्री दान की।
तिलकूट और लड्डू की खास मांग
बाजारों में सकट चौथ के लिए खास रौनक देखने को मिली। तिल और गुड़ से बने तिलकुट, लड्डू और गजक की जमकर खरीदारी हुई। हजरतगंज, अमीनाबाद और चौक जैसे इलाकों में मिठाई और पूजन सामग्रियों की दुकानों पर भीड़ रही। बाजार में खरीदारी करतीं निशातगंज की ईशा ने बताया कि सकट पर्व पर गणेश भगवान को लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। यही वजह है कि बाजारों में तिल और गुड़ की मांग बढ़ जाती है।
पौराणिक महत्व
सकट चौथ को तिलकुट चौथ और संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। पंडित प्रशांत द्विवेदी ''''पंकज'''' ने बताया कि यह पर्व न केवल अपनी संस्कृति से जोड़ता है, बल्कि परिवार की खुशहाली के लिए सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है।