लखनऊ। औषधीय पौधों पर शोध को अधिक प्रमाणिक और प्रभावी बनाने के लिए वैज्ञानिक एवं मानकीकृत सैंपलिंग प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), नई दिल्ली की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में औषधीय पौधों के सैंपलिंग प्रक्रिया पर संवेदनशीलता एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना ने की। विशेषज्ञों ने बताया कि सही सैंपलिंग से पौधों की पहचान, प्रामाणिकता, गुणवत्ता और शोध परिणामों की पुनरुत्पादकता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। साथ ही यह होम्योपैथिक शोध और फार्माकोपियल दस्तावेज तैयार करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। तकनीकी सत्रों में डॉ. लिपि पुष्पा, डॉ. भारती वाधवा, डॉ. दिग्विजय वर्मा और डॉ. सतीश पटेल ने प्रतिभागियों को प्रतिनिधि नमूने के चयन, संग्रह की तकनीक, दस्तावेजीकरण, रखरखाव और संरक्षण के बारे में जानकारी दी।