आरटीई वाले बच्चों से स्कूलों में हो रहा सौतेला व्यवहार
बाकी बच्चों से अलग दूसरे कमरों में बैठाया जाता है
अभिभावकों ने विभाग, जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई शिकायत
अभिषेक सिंह
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिला पाने वाले बच्चों के साथ स्कूलों में सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें आम बच्चों के साथ कक्षाओं में नहीं बैठाया जा रहा है। आरटीई के तह दाखिला पाने वाले सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाते हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए अलग शिक्षक तैनात किया गया है। अभिभावकों ने इसे अमानवीय व्यवहार बताया और इसकी शिकायत संबंधित विभाग, जनसुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी की है।
आरटीई के तहत अल्प आय वर्ग वाले अभिभावकों के बच्चों को निजी स्कूलों की कक्षा नर्सरी और एक में निशुल्क दाखिला दिया जाता है। आरटीई के तहत पहले चरण की सूची में 10,586 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं। इनमें से कितने बच्चों को दाखिला मिल चुका है, विभाग के पास अभी स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। अभी दूसरे चरण की प्रक्रिया चल रही है। सभी बच्चों को 31 जुलाई तक दाखिला दिलाना है। इस बीच कई स्कूलों से शिकायतें आ रही हैं कि अभी तक उन्हें बच्चों की सूची नहीं मिली है। वहीं जिन स्कूलों ने दाखिला दिया है, अभिभावक उनपर अपने बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं।
अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों को अलग कमरे में बैठाया जाता है। उनको पढ़ाने वाला शिक्षक भी अलग है। अभिभावकों ने इसे अमानवीय व्यवहार बताया है। सभी बच्चों को एक समान शिक्षा पाने का अधिकार है। उन्होंने इसके विरोध में बेसिक शिक्षा विभाग, जनसुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
असेंबली तक में नहीं जाने दिया जाता
अभिभावकों ने अपनी शिकायतों में बताया कहा है कि निशुल्क दाखिले वाले बच्चों को असेंबली तक में नहीं जाने दिया जाता। अभिभावकों ने शिकायत में यह भी कहा है कि स्कूलों में जितने भी कार्यक्रम होते हैं, उनसे भी निशुल्क दाखिले वाले बच्चों को दूर रखा जाता है। अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों की मन पर बुरा असर पड़ रहा है। वे दूर से ही बाकी बच्चों को देखते हैं।
स्कूलों का अपना तर्क
इसको लेकर स्कूलों का अपना तर्क है। स्कूलों की मानें तो निशुल्क दाखिले वाले बच्चों की बौद्धिक क्षमता कम है। उन्हें बिना किसी तैयारी के सीधे दाखिला मिला है। जबकि बाकी बच्चे प्ले स्कूल से ही पढ़ते आए हैं। ऐसे में आरटीई के बच्चों को अलग से बेसिक पढ़ाई कराई जाती है ताकि वे बाकी बच्चों के लेवल पर आ सकें।
मामले की जांच कराएंगे
कुछ अभिभावकों ने इसको लेकर शिकायत की है। इसकी जांच कराई जाएगी। सभी बच्चों को एक समान पढ़ाई करानी है। सिर्फ आरटीई के बच्चों को अलग बैठा रहे हैं तो यह गलत है।
- डॉ. अमरकांत सिंह, बीएसए