लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया शोधपीठ की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। दक्षिण एशिया की विविधता, भाषा व संस्कृति को समर्पित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आईआईटी जोधपुर के डॉ. तोनिशा गुइन ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन और परिवर्तन का भी आधार बनती है।
जी.बी. पंत संस्थान के डॉ. कामेई सैमसन ने मणिपुर की महिलाओं की आर्थिक भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं शिव नादर विश्वविद्यालय के डॉ. पीसी. सैदलवी ने अरबी-मलयालम साहित्य के जरिये दक्षिण भारत में सांस्कृतिक संबंधों की व्याख्या की।
कुलपति प्रो. मनुका खन्ना के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. एसके. चौधरी ने और संयोजन प्रो. रंगोली चंद्र ने किया। समापन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. सतीश देशपांडे ने वैश्विक भाषाओं के प्रभुत्व और स्थानीय भाषाओं की पुनर्जीवित होती भूमिका पर बात रखी।