ऑक्सीजन संकट से निपटने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट और ऑक्सीजन जेनरेटर की खरीद के लिए फर्मों को 9 करोड़ 64 लाख 20 हजार रुपये के उपकरणों के सप्लाई ऑर्डर जारी कर दिए गए।
जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के अनुसार फर्मों को ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, ऑक्सीजन जेनरेटर की आपूर्ति जल्द कराने को कहा गया है।
वहीं, नॉन कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए प्रभारी अधिकारी ने खाका खींचा। इसके तहत इलाकावार ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता तय होंगे।
प्रभारी अधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने जिले के नॉन कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति आठ ट्रेडर्स से कराने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा है।
खरीदे जा रहे उपकरण व उनके फायदे
ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर - 200 खरीदे जाएंगे। इनकी क्षमता 10 लीटर प्रति मिनट होगी। यह सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और कोविड चिकित्सालयों के लिए लिया जा रहा है।
ऑक्सीजन जेनरेटर : कुल 21 लिए जा रहे हैं। इनमें 45 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले 20 तो 50 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक होगा। इन्हें कोविड अस्पतालों के लिए लिया जा रहा है।
ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट : कुल 8 होंगे। इनमें पांच 9 एनएम क्यूब प्रतिघंटा क्षमता के और तीन 30 एनएम क्यूब प्रति घंटा क्षमता के होंगे। इनसे जिले के बड़े कोविड अस्पतालों को आपूर्ति होगी।
नॉन कोविड अस्पतालों को आठ ट्रेडर करेंगे आपूर्ति
प्रभारी अधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने जिले के नॉन कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति शहर के ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता आठ आपूर्तिकर्ताओं से कराने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा है। प्रस्ताव में प्रशासन से ट्रेडर्स को क्षेत्रवार अस्पतालों का आवंटन करके ऑक्सीजन आपूर्ति कराने की सिफारिश की गई है। प्रभारी अधिकारी ने औषधि विभाग में पंजीकृत आठ ट्रेडर्स के साथ रविवार को बैठक भी की। प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार, जिले के आठ आपूर्तिकर्ताओं को क्षेत्रवार नॉन कोविड अस्पताल आवंटित कर दिए जाएंगे।
मांग के अनुसार तय होगा प्लांट का कोटा
डॉ. जैकब ने बताया कि आपूर्तिकर्ताओं को आवंटित अस्पतालों की मांग के अनुसार प्लांट से कोटा तय किया जाएगा। कालाबाजारी रोकने के लिए इन आपूर्तिकर्ताओं को अस्पतालों को सप्लाई की गई ऑक्सीजन का डिलीवरी नोट दिखाना होगा।
अस्पतालों को भर्ती मरीजों और ऑक्सीजन की खपत का देना होगा ब्योरा
अस्पतालों को भी ट्रेडर से ऑक्सीजन लेने के लिए अपने यहां भर्ती ऑक्सीजन का उपयोग करने वाले मरीजों के आधार कार्ड आदि का ब्योरा देना होगा। प्रभारी अधिकारी ने सभी ट्रेडर को ताकीद किया कि कालाबाजारी या ज्यादा पैसा लेने वालों का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करते हुए महामारी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोविड अस्पतालों में अब तक नहीं हो पाया 24 घंटे का बैकअप
ऑक्सीजन एक्सप्रेस से आ रही आपूर्ति के बावजूद शहर में ऑक्सीजन का संकट अब भी बना हुआ है। हालात यह हैं कि निजी कोविड अस्पतालों को 24 घंटे का बैकअप नहीं मिल पा रहा है। मरीज भर्ती के लिए भटकते हुए अपनी जान गंवा रहे हैं। नॉन कोविड निजी अस्पतालों का भी ऐसा ही हाल है। कोविड व नॉन कोविड अस्पतालों में हजार से अधिक बेड खाली पडे़ हैं। कुछ निजी अस्पतालों ने ऑक्सीजन न मिलने से कोविड में नॉन कोविड में बदल लिया है। आयुष्मान योजना के तहत करीब 55 निजी अस्पतालों को कोविड में बदला गया था। इसमें पहले चरण में कुछ ही अस्पतालों में भर्ती शुरू हो पाई। बाकी अस्पताल ऑक्सीजन इंतजार में बैठे रहे। ऐसे में ऑक्सीजन न मिलने से निजी अस्पतालों ने कोविड को नॉन कोविड में बदलने के लिए पत्र भेजना शुरू कर दिया। इसमें ठाकुरगंज इलाके के एक अस्पताल ने खुद को नॉन कोविड में बदलवा लिया है। इसी तरह कई अन्य आवेदन डीएम के पास पडे हुए हैं। बड़े अस्पतालों में भरी मांग से बेहद कम ऑक्सीजन मिल रही है। इसमें मेयो, कुर्सी रोड स्थित सांई हॉस्पिटल, इंटीग्रल, राजधानी, कैरियर, मेकवेल, ग्रीन सिटी समेत अन्य अस्पताल शामिल हैं।