प्रवेंद्र गुप्ता
इंदिरानगर और गोमतीनगर की करीब पांच लाख की आबादी को पेयजल देने वाले तीसरे जलकल को भी शारदा सहायक नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते आपूर्ति में कटौती की जा रही है।
पिछले 17 दिन से नहर से पानी आना बंद है। ऐसे में पानी जमा करने के लिए बनी कठौता झील में अब सिर्फ एक सप्ताह का ही पानी बचा है। यदि सिंचाई विभाग ने पानी नहीं छोड़ा तो पेयजल का गंभीर संकट होगा।
गोमतीनगर में शहर का तीसरा जलकल शारदा सहायक नहर से मिलने वाली पानी पर निर्भर है। शारदा से पानी जलकल के पास बनी कठौता झील में लाया जाता है और वहां से जलकल के प्लांट में शोधित कर आपूर्ति होती है।
जब सिंचाई विभाग मरम्मत के लिए नहर बंद करता है तो उस दौरान कठौता झील में जमा पानी से काम चलाया जाता है। हालांकि, इससे इंदिरानगर और गोमतीनगर को 22 दिन तक ही आपूर्ति की जा सकती है।
इससे पहले सिंचाई विभाग को पानी छोड़ना होता है, पर ऐसा होता नहीं है। वादे के बाद भी सिंचाई विभाग देरी से पानी छोड़ता है और शहर में कई दिन पानी संकट रहता है।
झील बंद हुए 15 दिन बीत गए हैं। ऐसे में समय से पानी छोड़ने को लेकर जलकल विभाग ने सिंचाई विभाग को पत्र भी भेज दिया है।
22 दिन का पानी और नहर 30 दिन के लिए बंद
शारदा नहर को सिंचाई विभाग ने एक माह के लिए बंद किया है, जबकि कठौता झील में करीब पांच लाख की आबादी के लिए 22 दिन का ही पानी जमा किया जा सकता है। ऐसे में तीसरे जलकल से इंदिरानगर, गोमतीनगर की टंकियों और भूमिगत टैंक भरने के लिए पानी की आपूर्ति में इस समय एक-एक घंटे की कटौत की जा रही है। उधर, इस वक्त झील में 11 फीट पानी है, जिसमें पांच फीट के बाद आपूूर्ति नहीं हो पाती है। ऐसे में अधिकतम दस दिन ही कटौती के साथ पानी की आपूर्ति हो पाएगी।
ट्यूबवेल चलाकर कम किया जा रहा है संकट
नहर बंद होने से पैदा हुए जल संकट को जलकल विभाग ट्यूबवेल चलाकर कम करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए इंदिरानगर और गोमतीनगर में जोनल अभियंताओं को महाप्रबंधक की ओर से आदेश दिए गए हैं। हालांकि, इसके बावजूद पानी का संकट बना हुआ है। गोमतीनगर विपुल खंड की संगीता सक्सेना व मानवाधिकार जनसेवा परिषद के रूप कुमार शर्मा ने बताया कि कई दिनों से कभी एक तो कभी आधा घंटा ही पानी आ रहा है, जिससे समस्या हो रही है।
सिंचाई विभाग को भेजा पत्र
कार्यवाहक महाप्रबंधक जलकल, राम कैलाश ने बताया कि कठौता झील में पानी छोड़ने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र भेज दिया गया। यह भी बताया गया है कि आपूर्ति में कटौती के बाद एक सप्ताह का ही पानी झील में बचा है। ऐसे में नहर की बंदी एक महीने से कम कर एक सप्ताह पहले पानी छोड़ दिया जाए, ताकि संकट न हो।