पीडब्ल्यूडी में चहेतों को ही सड़कों का टेंडर दिलवाने की बड़ी साजिश सामने आई है। करीब 32 करोड़ रुपये लागत की तीन सड़कों के टेंडर नोटिस में गलत बैंक खाता नंबर दे दिया गया। इससे तमाम ठेकेदार टेंडर ही नहीं डाल पाए। वहीं, चहेते ठेकेदारों को गुपचुप ढंग से सही एकाउंट नंबर बता दिया गया। ‘अमर उजाला’ के मामले की पड़ताल किए जाने के बाद विभागाध्यक्ष राजपाल सिंह ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं।
तीनों मामले मऊ जिले से संबंधित हैं। यहां चिरैयाकोट-मोहम्मदाबाद-घोसी-मधुबन मार्ग के छूटे भाग का सुदृढ़ीकरण करने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। कुल 1.940 किमी लंबाई में यह काम कराया जाना था। इसी तरह से मऊ जिले में ही वाराणसी-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-29 के किमी 112.460 से 122.00 और 122 से 143.340 तक राइडिंग क्वालिटी के सुधार कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। तीनों कार्यों की लागत 32.40 करोड़ रुपये है।
टेंडर नोटिस में जवाहर भवन, लखनऊ एसबीआई के एक खाते में धनराशि ऑनलाइन जमा करने के लिए कहा गया। तमाम ठेकेदारों ने कोशिश की, मगर इस अकाउंट में रकम जमा नहीं कर सके। बाद में उन्हें पता चला कि यह खाता चालू हालत में ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार कुछ ठेकेदारों को मऊ के पीडब्ल्यूडी के स्थानीय अधिकारियों ने सही अकाउंट नंबर बता दिया था।
इन ठेकेदारों ने ऑनलाइन राशि जमा कर दी। यही ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सके। बाकी टेंडर शुल्क और अर्नेस्ट मनी (धरोहर राशि) जमा न कर पाने के कारण टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गए। पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि कुछ ठेकेदारों ने इसकी शिकायत की थी। आजमगढ़ के मुख्य अभियंता को जांच के लिए कहा है। इस संबंध में जारी पत्र में प्रकरण की जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है।