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इन्वेस्टर्स समिट में अफसरों ने किया लाखों का घोटाला, 125 वाहन सात दिन तक रोज 23 घंटे ढोते रहे गमले

Sat, 08 Dec 2018 02:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट इन्वेस्टर्स समिट में हुई सजावट में भी घपला करने से अफसर नहीं चूके। तमाम मदों में न सिर्फ बाजार रेट से कहीं ज्यादा दरों पर भुगतान किया गया, बल्कि सरकारी धन का गबन भी किया। जांच रिपोर्ट में सरकार को कुल मिलाकर 85 लाख 54 हजार 26 रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। 
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जांच रिपोर्ट में तत्कालीन उद्यान अधीक्षक धर्मपाल यादव और प्रभारी उद्यान संजय राठी के कारनामों का विस्तार से खुलासा किया गया है। यह भी कहा गया है कि कई मदों में हुए नुकसान का अब वास्तविक आकलन मुमकिन नहीं है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 19 से 25 फरवरी तक गमलों के परिवहन में रोज 125 वाहन लगाए गए। रिकॉर्ड के अनुसार, प्रत्येक वाहन प्रतिदिन 23 घंटे चलाया गया। प्रत्येक वाहन ने प्रतिदिन 479 किलोमीटर दूरी तय की। जांच समिति ने लिखा है-वाहनों का 24 घंटे में औसतन 23 घंटे काम करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
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कार्य करने के सातों दिन 125 वाहनों का रोजाना उपयोग होना भी स्वीकार करने योग्य नहीं है। अगर 125 से अधिक वाहन लगाए जाते तो अतिरिक्त घंटे और अतिरिक्त किलोमीटर की दरों से बचा जा सकता था। नतीजतन, कम खर्च में आवश्यक कार्य पूर्ण कराया जा सकता था। इससे करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

टेंडर के बजाय कोटेशन से की गई पौधों की खरीद

पौधों की खरीद टेंडर के बजाय कोटेशन से की गई। इसके लिए 39 विभिन्न प्रकार के पौधों को अलग-अलग आइटम मानकर टुकड़ों में तोड़ा गया, ताकि खरीद को एक लाख रुपये से नीचे रखा जा सके। यह प्रक्रिया प्रोक्योरमेंट मैनुअल का खुला उल्लंघन है।

एक लाख से अधिक की खरीद कोटेशन के माध्यम से नहीं की जा सकती। इसके लिए ई-टेंडर आमंत्रित करना पड़ता। तब रेट कहीं कम मिलते। वहीं, खरीद के लिए बड़ी नर्सरियों के बजाय बेहद छोटी नर्सरियों को चुना गया।

इसके लिए उद्यान अधीक्षक और प्रभारी उद्यान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि पौधा खरीद में ही 54 लाख से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया गया। गमलों पर टेराकोटा पेंट नहीं हुआ, लेकिन उस पर भी 1.93 लाख रुपये का खर्च दिखा दिया गया। 

यहां बता दें कि फरवरी में हुई इन्वेस्टर्स समिट में कुल 2 करोड़ 48 लाख 197 रुपये का खर्च दिखाया गया। इसमें से 1 करोड़ 51 लाख 91 हजार 815 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि घपले की शिकायतें मिलने पर 96 लाख 10 हजार 158 रुपये का भुगतान रोक दिया गया है।
 
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कहां-कितना लगाया चूना

गमला परिवहन--10,00,000 रुपये
गमला सजाना--80,000 रुपये
सीमेंट गमला खरीद/गमला पेंट--5,03,200 रुपये
गमला तैयारी--1,12,000 रुपये

टेराकोटा पेंट--1,93,150 रुपये
टेराकोटा बर्जर खरीद--98,600 रुपये
जड़ के आकार के गमला क्रय--89,100 रुपये

पौधा खरीद--54,56,850 रुपये
सिरेमिक, मिट्टी गमला खरीद--9,18,075 रुपये
गबन--1,03,051 रुपये
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