पौधों की खरीद टेंडर के बजाय कोटेशन से की गई। इसके लिए 39 विभिन्न प्रकार के पौधों को अलग-अलग आइटम मानकर टुकड़ों में तोड़ा गया, ताकि खरीद को एक लाख रुपये से नीचे रखा जा सके। यह प्रक्रिया प्रोक्योरमेंट मैनुअल का खुला उल्लंघन है।
एक लाख से अधिक की खरीद कोटेशन के माध्यम से नहीं की जा सकती। इसके लिए ई-टेंडर आमंत्रित करना पड़ता। तब रेट कहीं कम मिलते। वहीं, खरीद के लिए बड़ी नर्सरियों के बजाय बेहद छोटी नर्सरियों को चुना गया।
इसके लिए उद्यान अधीक्षक और प्रभारी उद्यान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि पौधा खरीद में ही 54 लाख से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया गया। गमलों पर टेराकोटा पेंट नहीं हुआ, लेकिन उस पर भी 1.93 लाख रुपये का खर्च दिखा दिया गया।
यहां बता दें कि फरवरी में हुई इन्वेस्टर्स समिट में कुल 2 करोड़ 48 लाख 197 रुपये का खर्च दिखाया गया। इसमें से 1 करोड़ 51 लाख 91 हजार 815 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि घपले की शिकायतें मिलने पर 96 लाख 10 हजार 158 रुपये का भुगतान रोक दिया गया है।