बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय में आग लगने की घटना, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच हो चुकी है। पर, इन सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर जांच समितियां गठित करके मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
बाबुओं के समूह के कारनामों की तमाम शिकायतें निदेशालय से लेकर शासन तक दबी पड़ी हैं। सभी मामलों में विभागीय जांच समिति बनाकर लीपापोती कर दी गई। लिहाजा प्रमोशन घोटाले के मौजूदा मामले में गठित विभागीय समिति से निष्पक्ष व पारदर्शी जांच को लेकर आशंका पैदा हो गई है।
निदेशालय के एक पत्र की खूब हो रही चर्चा
अनियमित प्रमोशन के खेल में शामिल दो बाबुओं के पक्ष में निदेशालय से शासन को भेजे गए एक पत्र की काफी चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि जिस दिन प्रमोशन घोटाले की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित हुई, उसके अगले दिन ही निदेशालय से शासन को एक पत्र भेजा गया।
इसमें लिखा है कि एक संगठन का अध्यक्ष व महामंत्री होने के नाते दोनों बाबुओं को मुख्यालय से हटाया जाना मुमकिन नहीं है। इनमें से एक बाबू वही है, जिन्हें एक ही दिन में दो प्रमोशन दिया गया, जबकि दूसरा बाबू पिछले 15-20 साल से निदेशालय में जमा हैं और सारे खेल का मास्टरमाइंड भी हैं।