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सुप्रीम कोर्ट का आदेश छिपाकर पोषाहार आपूर्ति की अवधि बढ़वाई, अफसरों व बाबुओं का घपला खुला

Thu, 28 May 2020 02:24 PM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अफसरों व पंजीरी सिंडिकेट की साठगांठ से हो रहा एक-एक खेल सामने आ रहा है। अधिकारियों ने पोषाहार के पैकेटों पर बारकोडिंग की शर्त को भुला ही दिया। साथ में सिडिंकेट के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को छिपाकर पोषाहार आपूर्ति की अवधि भी 4 महीने बढ़वा ली।

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यही नहीं निदेशालय के अफसरों व बाबुओं ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश छिपाते हुए अवधि विस्तार की फाइल पर अनुमोदन भी करा लिया था। हालांकि 2018 में हुए एक टेंडर में अनियमितता की शिकायत पर सतर्कता जांच के आदेश पर प्रमुख सचिव ने आपूर्ति अवधि बढ़ाये जाने के आदेश पर रोक लगा दी थी लेकिन प्रमुख सचिव के अवकाश पर जाने के बाद फाइल फिर चल पड़ी है।

दरअसल, महाराष्ट्र की वैष्णो रानी महिला बचत संस्था ने पोषाहार आपूर्ति का काम निजी कंपनियों को देने के खिलाफ 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने 26 फरवरी, 2019 को कहा था कि पोषाहार आपूर्ति की आड़ में निजी कंपनियां योजना का पैसा हड़प रही हैं। कोर्ट ने निजी कंपनियों के पोषाहार आपूर्ति पर तत्काल रोक लगाते हुए महिला मंडल व स्वयं सहायता समूहों से आपूर्ति कराने के निर्देश दिए थे।
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इसी तरह पीयूष कुमार नाम के व्यक्ति ने 3 मार्च 2020 को आरटीआई के तहत सीएम कार्यालय से पोषाहार आपूर्ति निजी कंपनियों से कराने व उनके नाम की जानकारी मांगी थी। सीएम कार्यालय ने दो दिन बाद ही आरटीआई को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग भेज दिया था। विभाग ने इसका जवाब आज तक नहीं दिया। वहीं, इन दोनों तथ्यों को छिपाते हुए उन कंपनियों के ही आपूर्ति के ठेके की अवधि 4 माह बढ़ाने का प्रस्ताव भेज दिया, जिनको अप्रैल 2018 में दो वर्ष के लिए ठेका दिया गया था। उस समय भी इन कंपनियों को काम देने के लिए निविदा में बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायत हुई थी।

आपूर्ति आदेश भी हो गया जारी

गौरतलब है कि निदेशालय स्तर से पोषाहार आपूर्ति की समय सीमा का विस्तार किए जाने का प्रस्ताव 20 अप्रैल को शासन को भेजा गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कोई जिक्र नहीं था। इसे छिपाकर अधिकारियों ने उस प्रस्ताव पर 23 अप्रैल को अनुमोदन प्राप्त कर लिया था।

अनुमोदित फाइल पहुंचने के साथ ही गृह विभाग द्वारा सतर्कता जांच का आदेश भी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के पास पहुंच चुका था। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव ने पोषाहार आपूर्ति आदेश (डीआई) जारी करने पर रोक लगा दी थी। कुछ दिन बाद प्रमुख सचिव जब लंबे अवकाश पर चली गईं तो इस फाइल को फिर से चला दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिव द्वारा लगाई रोक की वजहों का निस्तारण करके फाइल को दुबारा अनुमोदन के लिए भेजा गया, जिस पर अनुमोदन मिल गया है। बुधवार को निदेशालय ने आपूर्ति आदेश जारी भी कर दिया है।

नई निविदा न मांगने पर उठे सवाल
2018 में जारी निविदा की अवधि इस साल 25 अप्रैल को समाप्त हो रही थी। जबकि नई निविदा की प्रक्रिया पुरानी निविदा की तिथि समाप्त होने के तीन-चार माह पहले ही शुरू कर दी जाती है। इसके बाद भी नई निविदाएं नहीं मांगी। जबकि उस समय लॉकडाउन की स्थिति भी नहीं थी। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी इन कंपनियों को ही आपूर्ति का काम देने के लिए जानबूझ कर देरी किए और बाद में लॉकडाउन की आड़ लेकर अपरिहार्य स्थिति दिखाते हुए आपूर्ति की अवधि को 4 माह बढ़ाने का प्रस्ताव भेज दिया।
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2018 में इन 14 कंपनियों को दिया गया था ठेका

- आदित्य फ्लोर मिल प्राइवेट लिमिटेड
- नीलगिरी फूड प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड
- त्रिकाल फूड एंड एग्रो प्रोडक्टस प्रा.लि.
- राउसीना उद्योग लिमिटेड
- पीबीएस फूडस प्राइवेट लिमिटेड

- देवेश फूड एंड एग्रो प्रोडक्टस प्रा.लि.
- सुरुचि फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
- राशि न्यूट्री फूड्स
- कोटा दाल मिल
- कॉन्टीनेंटल मिलकोज इंडस्ट्रीज लिमिटेड

- इंटरलिंक फूड्स लिमिटेड
- कैमैस्टर फूड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड
- श्री लालजी एनर्जी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
- हेल्थकेयर इनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड
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