अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार के अनुसार
-सीआरपीसी सेक्शन 41ए के जरिए गैरजरूरी गिरफ्तारी रोकने के प्रावधान किए गए हैं। आरोपी को पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होने का नोटिस जारी किया जाएगा।
-पुलिस अधिकारी को जहां लगेगा कि आरोपी की गिरफ्तारी जरूरी नहीं है वे आरोपी को नोटिस जारी करेगा और अपने सामने उपस्थित होने के लिए कहेगा।
-अगर आरोपी नोटिस का अनुपालन करता है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, गिरफ्तार किया जाता है तो अधिकारी वजह लिखेगा।
-अगर आरोपी नोटिस का अनुपालन नहीं करता है, पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार कर सकता है।
इन्हीं प्रावधानों के आधार पर अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुकी है कि, पुलिस अधिकारी को आरोपी को गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं है, वह नोटिस जारी करेगा।
यह है मामला
गोंडा जिले की अनुसूचित जाति की शिवराजी देवी ने 19 अगस्त 2018 को गोंडा के खोड़ारे थाने में याची राजेश मिश्रा और अन्य तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि विपक्षीगण पुरानी रंजिश को लेकर उसके घर में घुस आए फिर उसे और उसकी बेटी को जातिसूचक गालियां दी। लात-घूंसों व लाठी-डंडे से पीटा।