लखनऊ। संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थी पुरोहित, ज्योतिषी और शिक्षक बनने तक ही सीमित नहीं हैं। सिविल सेवा की परीक्षा में संस्कृत विषय लेकर विद्यार्थी सफलता हासिल कर रहे हैं। इस सफलता को और बढ़ाने के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विशेष तरह का परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है। इसका मकसद संस्कृत को बढ़ावा देने के साथ ही प्रशासनिक सेवा में इसके जानकारों की संख्या बढ़ाना है।
संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि परिसर में बीए ऑनर्स संस्कृत व सिविल सर्विस स्टडीज में चार वर्षीय पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई है। इनमें संस्कृत के अलावा इतिहास, राजनीति शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र की पढ़ाई होगी। इन विषयों के साथ ही परास्नातक की पढ़ाई करके अकादमिक क्षेत्र में भी जाने का माैका मिलेगा। कोर्स के दौरान विद्यार्थियों को संस्कृत और सामान्य अध्ययन के सभी पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएंगे। मान्यता प्राप्त किसी भी बोर्ड से 12 वीं कक्षा पास विद्यार्थियों को इसमें प्रवेश का मौका मिलेगा।
संस्कृत के विद्यार्थियों की यूपीएससी व यूपीपीसीएस में सहभागिता
आईएएस
साल- प्रारंभिक परीक्षा- मुख्य परीक्षा- साक्षात्कार- चयन
2019 - 2600 - 79 - 11 -04
2020 - 2901 - 65 - 12 -05
2021 - 2765 - 54 - 09 -03
2022 - 2879 - 81 - 13 -05
2023 - 2729 - 95 - 18 -06
2024 - 2928 -102 - 00 -00
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पीसीएस
साल- प्रारंभिक परीक्षा- मुख्य परीक्षा- साक्षात्कार- चयन
2019 - 2126 - 51 - 11 -07
2020 - 2361 - 37 - 17 -11
2021 - 1965 - 46 - 19 -12
2022 - 1821 - 27 - 13 -10
2023 - 2019 - 28 - 14 -09
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संस्कृत विषय लेकर हासिल की प्रशासनिक सेवा में सफलता
यूपी के बांदा जिले का निवासी हूं। साल 2021 और 2022 में संस्कृत विषय से ही पीसीएस की परीक्षा पास की। इस समय चित्रकूट में वित्त लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत हूं। बीते कुछ सालों में धार्मिक परंपराओं से हटकर संस्कृत के विद्यार्थी सिविल सेवा के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे हैं। संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सरकार की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों की नियुक्त की जाती है। इनमें नए ग्रंथ की खोज, दार्शनिक व अन्य शामिल हैं।
- देवप्रकाश सिंह, वित्त लेखाधिकारी चित्रकूट
संस्कृत से सिविल सेवा परीक्षा की राह आसान
कुशीनगर की निवासी हूं। संस्कृत विषय से पीसीएस-2021 की परीक्षा पास की और इस समय फिरोजाबाद के टूंडला में एसडीएम पद पर कार्यरत हूं। सिविल सेवा की परीक्षा में वैकल्पिक विषय में संस्कृत के जरिये परीक्षा में मदद मिलती है। क्योंकि, संस्कृत व्याकरण से नंबर अच्छे मिलते हैं। जैसे गणित विषय में नंबर नहीं कटते ठीक उसी तरह संस्कृत विषय में भी अंक दिए जाते हैं। संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रोफेसर के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के द्वार खुल रहे हैं। - अनुराधा सिंह, एसडीएम, फिरोजाबाद टूंडला