लखनऊ। भाड़े का हत्यारा संजीव खान मुबारक और उसके साथियों के इशारे पर हत्याकांड को अंजाम देता था। 12 वर्ष जेल में रहने के बाद भी आरोपी नहीं सुधरा। वह चंद रुपयों की लालच में हत्या की सुपारी लेता था।
एएसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक आरोपी अंबेडकरनगर में कुख्यात था। उसने बस्ती, गोंडा, अयोध्या और लखनऊ में भी दहशत फैला रखी थी। उसके खिलाफ पांच जिलों में 13 मामले दर्ज हैं। वर्ष 2023 में वह हत्या के एक मामले में 12 वर्श बाद जेल से रिहा हुआ था।
15 वर्ष पहले रखा था अपराध जगत में कदम : संजीव ने वर्ष 2011 में अपराध जगत में कदम रखा था। 9 मार्च 2011 को उसने अंबेडकरनगर के जामूकला निवासी विजय प्रताप की लूट के बाद हत्या की थी। यही नहीं, तीन मई 2011 को आरोपी ने अंबेडकरनगर के ही छोटेलाल को गोली मारकर लूटपाट की थी। 26 मार्च 2011 को संजीव ने हैदरगंज अयोध्या निवासी कुसुम पांडेय से असलहे के बल पर लूट की थी। इसके अलावा 24 अप्रैल 2011 को बस्ती के सराफ लाल बहादुर सोनी की दुकान में घुसकर हत्या कर लूट की थी।
भागा हुआ है शूटर का सहयोगी
मूलरूप से जौनपुर निवासी बिल्डर संदीप सिंह की हत्या में शामिल संजीव का साथी भागा हुआ है। उस पर भी एक लाख का इनाम है। एएसपी दीपक कुमार सिंह का कहना है कि उसकी तलाश जा रही है। इसके पहले शूटर उपलब्ध कराने वाले इनामी गंगाराम, साजिशकर्ता दिनेश यादव और उसके चालक मुकर्रबीन को गिरफ्तार किया गया था। हत्या के पीछे प्रापर्टी विवाद सामने आया था।
पिता व भाई बोले- फंसाया गया
अंबेडकरनगर। एनकाउंटर की खबर मिलने पर संजीव के पिता हरिराम और भाई राजबब्बर ने कहा कि संजीव प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ चीनी मिल में बैगास की ढुलाई कर रहा था। वह परिवार के भरण पोषण की ओर ध्यान दे रहा था। 21 अप्रैल को बहन रूपा की शादी में शामिल हुआ था। 15 दिनों से उसका फोन बंद आ रहा था। उसकी तलाश के प्रयास किए जा रहे थे। परिजनों का आरोप है कि संजीव को इस हत्याकांड में फंसाया गया है।
पत्नी व पांच बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
संजीव चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। उसके पिता हरिराम लंबे समय से बीमार हैं और बेटे की आपराधिक गतिविधियों को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। संजीव के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे अमरेश (25), शिवा (19) और राज (18) व दो बेटियां ब्यूटी (17) और सृष्टि (14) हैं। संजीव की मौत की खबर मिलने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जेल से रिहा होने के बाद पिछले करीब तीन वर्षों से संजीव गांव में रह रहा था। हालांकि वह ज्यादातर गोसाईंगंज के वंदनपुर स्थित ससुराल में रहता था।
माफिया दिलीप के साथ मिलकर कई वारदात को दिया अंजाम
अंबेडकरनगर। अयोध्या के गोसाईंगंज के बधुंहरा सरैंया का दिलीप वर्मा पेशेवर अपराधी है। अंबेडकरनगर, अयोध्या समेत कई जिलों में इसके खिलाफ तमाम मामले दर्ज हैं। संजीव इसके गिरोह से जुड़ा था और दोनों ने मिलकर कई वारदात को अंजाम दिया था। इन दिनों माफिया दिलीप सफेदपोश भाजपा नेताओं के आसपास अधिक देखा जा रहा है। दिलीप वर्मा पंचायत चुनाव में टांडा से ब्लॉक प्रमुख बनने की जुगत में है। यही वजह है कि हाल ही में दिलीप वर्मा ने नवघोषित जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल देव के स्वागत में लखनऊ से अंबेडकरनगर तक खूब दौड़ लगाई। इसके फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।
संजीव की फाइल फोटो।