लखनऊ आते हैं तो खाने में पहली पसंद क्या रहती है?
मेरठ में काफी समय रहा हूं, वहां की गुड़ रेवड़ियां पसंद थीं। यहां की रेवड़ियां शक्कर की होती हैं, लेकिन होती बड़ी टेस्टी हैं। इसके अलावा कबाब।
लेकिन बाहर का खाने से बचता हूं। पिछली बार जब आया तो चौक की मशहूर दुकान पर किसी से मिलने गया तो वहां बाहर निकलने पर सैकड़ों लोग गलियों में जमा हो गए।
मुझे लगा कि हीरो हिरोइन भी होंगे, बाद में पता चला कि वो सब मुझे ही देखने, मिलने फोटो खिंचाने आए थे। उसके बाद से किसी रेस्तरां वगैरह में जाने से बचता रहता हूं।
वैसे लखनऊ खान-पान के शौकीनों का शहर है। बाहर कहते हैं कि लखनऊ खवइयों का शहर है। वैसे सादा-सिंपल फूड मेरी प्राथमिकता में रहता है।
22 साल बाद संजीव किन अनुभवों से दो-चार हो रहे हैं?
एक तो अब खाना बनाना सांस लेने जैसा हो चला है, दूसरा अब खाना बनाने के टिप्स एयरपोर्ट पर भी शेयर हो रही हैं। कहीं भी आओ जाओ एयरपोर्ट पर लोग दौड़कर फोटो खिंचवा कर कोई न कोई टिप्स शेयर करने लगते हैं।
इनमें बच्चों की अच्छी खासी तादाद है। लखनऊ में उतरते ही लोगों से सामना हो गया। अच्छी बात है कि नई पौध कुकिंग की ओर झुक रही है। दुनिया भी वेजी हो रही है।