केंद्रीय जांच एजेंसी के इनपुट पर मंगलवार देर रात एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने विभूतिखंड इलाके से महाठग संजय शेरपुरिया को गिरफ्तार किया गया है। एसटीएफ ने संजय पर केस दर्ज कराया है। कई घंटे पूछताछ की। यूपी, दिल्ली और गुजरात में महाठग का बड़ा नेटवर्क है।
महाठग संजय राय शेरपुरिया दिल्ली के एक बड़े उद्योगपति से छह करोड़ रुपये की डील में फंसा है। उद्योगपति का केंद्रीय जांच एजेंसी का केस/जांच रफादफा कराने का संजय ने ठेका लिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी व नोएडा एसटीएफ को इसकी जानकारी हुई। तफ्तीश कर साक्ष्य जुटाए और मंगलवार को विभूतिखंड इलाके से उसे दबोच लिया।
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एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस्तेमाल करने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। अब उसका इतिहास खंगाला जा रहा है। कई बड़ी हस्तियां भी जांच की जद में आ गई हैं। संजय राय मूलरूप से गाजीपुर जिले का रहने वाला है।
वर्तमान में वह दिल्ली में रहता है। गुजरात में बड़ा कारोबार रहा है। यूपी, दिल्ली व गुजरात में उसका नेटवर्क है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, उद्योगपति गौरव डालमिया की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी कर रही है। गौरव किसी के जरिये संजय राय के संपर्क में आया। संजय राय ने दावा किया वह केंद्रीय जांच एजेंसी का मामला रफादफा करवा देगा।
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इसके लिए उसने गौरव से छह करोड़ की डील की। ये रकम संजय को पहुंच गई। चूंकि केंद्रीय जांच एजेंसी पहले से ही प्रकरण में सक्रिय थी, इसलिए उसको इसकी भनक लग गई। एसटीएफ की नोएडा यूनिट को भी जानकारी दी गई। एसटीएफ ने अपने स्तर से तफ्तीश की। संजय राय के बैंक खातों का विवरण निकाला। उसके बाद तलाश शुरू की थी। गिरफ्तारी करने के बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर सचिन ने केस दर्ज कराया। विवेचना अब विभूतिखंड पुलिस करेगी।
एनजीओ के नाम पर करोड़ों का खेल
संजय राय फॉर यूथ के नाम से संस्था चलाता है। इसमें करोड़ों रुपये की डोनेशन आती है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस संस्था के खातों का एक एक ट्रांजेक्शन का विवरण जुटा तस्दीक कर रही है। इससे पता चल सके कि संस्था कब से सक्रिय है। कितने का लेनदेन व हेरफेर हुआ। एनजीओ के जरिये ही वह बड़ी रकम खपाता है। सूत्रों के मुताबिक शैल कंपनियां बनाकर भी कालेधन को सफेद किया गया है। आगे की जांच में ये सभी तथ्य स्पष्ट होंगे।
ट्विटर अकाउंट किया डी-एक्टिवेट
संजय शेरपुरिया के नाम से उसका ट्विटर अकाउंट है। गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद उसका ट्विटर अकाउंट डी-एक्टिवेट हो गया। उस पर उसने तमाम बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें साझा कर रखी थीं। यही नहीं, कई बड़े आयोजनों में वह मुख्य अतिथि व विशेष अतिथि बनकर शामिल होता रहा है। इन आयोजन संबंधी पोस्ट भी उसके ट्विटर अकाउंट पर उपलब्ध थे। गिरफ्तारी के बाद अकाउंट का डिलीट होना स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया उसकी टीम हैंडल करती है। एसटीएफ अब उसके संपर्क के लोगाें को तलाश रही है।
गोपनीय कार्रवाई, किसी को भनक तक नहीं, अफसर खामोश
एसटीएफ ने गिरफ्तारी करने के बाद इस बारे में किसी तरह की कोई जानकारी साझा नहीं की। कमिश्नरेट पुलिस भी प्रकरण में खामोश रही। कमिश्नरेट की तरफ से कोई बयान भी जारी नहीं किया गया। ये शायद इसलिए कि संजय सत्ताधारियों का करीबी है। करोड़ों का हेरफेर किया है। इसलिए गोपनीय कार्रवाई की गई है।