राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार नए साल पर एक बार फिर गांव-गांव राममय माहौल बनाने की तैयारी में जुट गया है। सर्वोच्च न्यायालय से मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद शांति व्यवस्था और अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू होने पर कोरोना के चलते बड़ा उत्सव न कर सके संघ और विश्व हिंदू परिषद ने अब इस मुद्दे पर हिंदुओं को मंदिर के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ने तथा गांव-गांव राममय माहौल बनाने की योजना बनाई है। यह अभियान मकर संक्रांति 15 जनवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेगा। प्रयागराज में संघ और विहिप की मंगलवार को संपन्न हुई बैठक में योजना की रूपरेखा तय की गई। इसके लिए प्रत्येक प्रांत में अभियान प्रमुख तय करते हुए उसके नेतृत्व में समितियां बनाई जाएंगी।
10 से 100 रुपये का लेंगे योगदान, 1000 से ऊपर चेक या ड्राफ्ट
संघ ने 90 के दशक में हुए शिलापूजन की तर्ज पर इस अभियान को चलाने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, देश के 11 करोड़ हिंदू परिवारों के सभी सदस्यों से न्यूनतम 10-10 रुपये की श्रद्धानिधि लेने की योजना बनी है। हालांकि अगर कोई 100 रुपये देना चाहता है तो उसका भी कूपन कार्यकर्ताओं के पास रहेगा, पर 1000 रुपये से ऊपर की राशि चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से ही ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए एक एप भी तैयार कराया जा रहा है ताकि पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी रहे।
आज से बैठकें
पूरी योजना को जमीन पर उतारने के लिए 26 नवंबर को कानपुर और 27 को अवध की लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। 29 को काशी की बैठक काशी में तथा 5 को गोरखपुर प्रांत की गोरखपुर में बैठक होगी। इसमें उस प्रांत के संघ परिवार के सभी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी बुलाए गए हैं। विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री अंबरीष कहते हैं कि कोशिश है कि भगवान राम के नाम के साथ ज्यादा से ज्यादा हिंदू परिवारों तक पहुंचा जाए। साथ ही उन्हें उनके अब तक के योगदान के लिए धन्यवाद देने के साथ रामलला के मंदिर के साथ उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ा जाए।