‘मिशन मोदी’ की यूपी में सफलता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी कमर कस ली है।
प्रदेश में संघ परिवार की स्थिति व कई संगठनों में अंदरूनी खींचतान से वाकिफ संघ ने पूरी स्थिति को एक बार समझ लेने की निर्णय किया है, जिससे उसी आधार पर आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके।
इसके लिए संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी यहां गुरुवार को संघ के प्रचारकों के साथ संगठन की स्थिति पर बातचीत करेंगे।
शुक्रवार को पूरे संघ परिवार के साथ उनकी बैठक होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से सोनी पर ही भाजपा के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा व विश्व हिंदू परिषद सहित ज्यादातर संगठनों की स्थिति से संघ लगातार चिंतित है। तमाम कोशिश के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
उधर, लोकसभा चुनाव के जरिये नरेंद्र मोदी को केंद्रीय राजनीति में स्थापित करने की योजना बना चुका संघ किसी भी स्थिति में अपने मिशन को विफल नहीं होने देना चाहता है।
हालांकि उसे यह भी पता है कि इसके लिए यूपी में भाजपा सहित संघ से जुड़े संगठनों की स्थिति सुधारनी होगी।
इसलिए है परेशान
संघ का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि भाजपा में खींचतान व गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। विश्व हिंदू परिषद सहित परिवार के कई संगठनों का ढांचा भी उतना मजबूत नहीं है।
ऐसे में अगर स्थिति नहीं सुधारी गई तो ‘मिशन मोदी’ को झटका भी लग सकता है। कारण, लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी की गुंजाइश उत्तर प्रदेश व बिहार से ही है।
दोनों राज्यों को मिलाकर लोकसभा की लगभग 120 सीटें हैं। इनमें बिहार में भाजपा के पास 12 और उत्तर प्रदेश में 10 सीटें हैं। इसलिए संघ को लगता है कि वह कोशिश करके इन दोनों राज्यों में सीटें बढ़ा सकता है।
इन सवालों के देने पड़ सकते हैं जवाब
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को सोनी की क्लास में भाजपा व संघ से जुड़े अन्य संगठनों को संगठनात्मक ढांचे और चुनाव की तैयारियों के लिए अब तक किए गए इंतजाम से संबंधित सवालों के जवाब देने पड़ सकते हैं।
साथ ही विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय से जुडे़ सवालों का भी उत्तर देना पड़ सकता है। माना यह भी जा रहा है कि संघ को ‘मिशन मोदी’ में किसी व्यक्ति के कारण बाधा पड़ने की आशंका दिखी तो उसके पर भी कतरे जा सकते हैं।