गुलाब गैंग के विरोध में बुंदेलखंड के गुलाबी गैंग की सम्पत पाल उतर आई हैं। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर बगैर जानकारी दिए फिल्म बनाने का आरोप लगाते हुए रिलीज से पहले कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
गुलाबी गैंग की सम्पत पाल का कहना है कि ‘गुलाबी गैंग’ पर आधारित फिल्म में कहीं उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया। न ही उनके नाम का जिक्र किया गया है।
इतना ही नहीं निर्माता-निर्देशक ने फिल्म बनाने से पहले एक बार भी हमसे संपर्क नहीं किया। न ही उन्हें जानकारी दी कि ‘गुलाबी गैंग’ पर फिल्म बनाई जा रही है। ऐसे में फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया जाएगा।
लाठी का भी लेंगी सहारा
उन्होंने कहा कि कोर्ट से बात नहीं बनेगी तो संगठन की महिलाएं लाठी का सहारा लेंगी। सम्पत पाल ने मांग उठाई है कि फिल्म की मुख्य नायिका का नाम ‘रज्जो’ से बदलकर ‘सम्पत पाल’ रखा जाए और फिल्म का नाम ‘गुलाब गैंग’ से ‘गुलाबी गैंग’ किया जाए।
साथ ही निर्माता-निर्देशक लिखित रूप से माफी मांगे, तभी फिल्म को रिलीज होने दिया जाएगा।
उधर, फिल्म से जुड़े सूत्र बताते हैं कि फिल्म ‘गुलाबी गैंग’ से प्रेरित जरूर है, लेकिन पूरी तरह से उस पर आधारित नहीं है। अब न तो फिल्म का नाम बदला जाएगा और न ही किरदारों का।
हालांकि, इस बाबत सम्पत पाल से बातचीत के प्रयास चल रहे हैं। फिल्म के निर्देशक व लेखक सौमिक सेन हैं, और इसे अनुभव सिन्हा ने प्रोड्यूस किया है।
कब हुआ गठित
बांदा निवासी सम्पत पाल ने वर्ष 2006 में ‘गुलाबी गैंग’ गठित की थी, जिससे अब तक तकरीबन 20,000 महिलाएं जुड़ चुकी हैं।
ये महिलाएं गुलाबी साड़ी पहनकर और हाथों में लाठियां लेकर पुरुषवादी सोच व समाज का विरोध करती हैं।
सम्पत बताती हैं कि दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न, महिला साक्षरता, घरेलू हिंसा, बालश्रम और बाल विवाह जैसे मुद्दों का विरोध करते आए हैं। एक मर्तबा गैंग पुलिसवालों को भी थाने में बंधक चुकी है।
पहले भी बन चुकीं हैं फिल्में
ऐसा नहीं है कि माधुरी दीक्षित व जूही चावला अभिनीत ‘गुलाब गैंग’ सम्पत पाल की जिंदगी पर आधारित पहली फिल्म है।
इससे पहले भी गैंग पर फिल्म व डॉक्यूमेंट्री बन चुकी हैं। साथ ही किताबें भी लिखी जा चुकी हैं। किम लौंगीनोटो ‘पिंक साड़ीज’ और निशिथा जैन ‘गुलाबी गैंग’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बना चुकी हैं।