- सोशल मीडिया पर अफवाह, फर्जी वीडियो और भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
- भड़काऊ बयान देने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- विवादित धार्मिक स्थलों के कोर्ट सर्वे से पहले विस्तृत खुफिया आकलन और सुरक्षा योजना तैयार की जाए।
- सर्वे से पहले दोनों पक्षों के संभ्रांत नागरिकों, धर्मगुरुओं और शांति समिति के सदस्यों से संवाद स्थापित किया जाए तथा सर्वे दिन के समय ड्रोन, बॉडी कैमरे और पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी में कराया जाए।
- संवेदनशील जिलों में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) को मजबूत किया जाए और थाना स्तर पर आधुनिक दंगा-रोधी उपकरण व पर्याप्त रिजर्व पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए।
- एएसआई संरक्षित स्मारकों में बिना अनुमति निर्माण या बदलाव पर तत्काल कानूनी कार्रवाई हो तथा जिला प्रशासन और एएसआई की संयुक्त टीम नियमित निरीक्षण कर अतिक्रमण व अवैध निर्माण रोके।
- सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए नियमित शांति समिति की बैठकें और नागरिक संवाद आयोजित किए जाएं।
19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा पेश किया।
19 नवंबर 2024-संभल के चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह ने दावा स्वीकृत किया।
19 नवंबर 2024- कोर्ट कमिश्रर नियुक्त किया, सर्वे के आदेश किए।
19 नवंबर 2024- शाम करीब 7 बजे कोर्ट कमिश्रर रमेश सिंह राघव जामा मस्जिद सर्वे के लिए पहुंचे।
22 नवंबर 2024-शुक्रवार की दोपहर सांसद बर्क ने जामा मस्जिद के बाहर खड़े होकर मीडिया से बातचीत की और मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। यह भाषण दिया था।
24 नवंबर 2024- सुबह 7 बजे कोर्ट कमिश्रर सर्वे के लिए पहुंचे थे, इसके बाद ही बवाल हुआ था।