अब बात करते हैं बुंदेलखंड की। इस इलाके में जल, जंगल और जमीन के साथ दलितों, मजदूरों को लेकर संघर्ष करने वाले संगठनों को लगातार सपा में शामिल किया जा रहा है। सपा यहां की बेरोजगारी के साथ पानी और सिंचाई का मुद्दा भी उठा रही है। पाठा क्षेत्र में लंबे समय से अधूरी चल रही पेयजल परियोजनाओं का मुद्दा उठाया जा रहा है। सपा शासन में किए गए बांधों के निर्माण से लेकर राहत पैकेट तक को अपनी उपलब्धि में गिनाया जा रहा है। इस इलाके में बनने वाले एक्सप्रेसवे और अन्य अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
दोनों इलाकों के खास मुद्दों पर फोकस
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के घोषणा पत्र में पूर्वांचल और बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर अलग-अलग मुद्दे शामिल किए जाएंगे। दोनों इलाकों के वरिष्ठ नेताओं को यहां के मुद्दों का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। यही वजह है कि पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड के ब्राह्मण नेताओं को भी पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है।
पूर्वांचल में लघु एवं सीमांत किसानों, बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है, वहीं बुंदेलखंड में अन्ना पशु, पानी, सिंचाई , मंडी और राहत पैकेट जैसे मुद्दे अहम माने जा रहे हैं। इन दोनों इलाके में टिकट बंटवारे से पहले दूसरे चरण का सर्वे भी चल रहा है।