लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को घेरने के लिए सपा उसी के हथियार का इस्तेमाल करेगी। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भाजपा की कोशिशों को नाकाम करने के लिए सपा अपनी छवि बदलेगी।
कुंभ मेले को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में सपा ने जिस तरह भाजपा को हिंदू विरोधी साबित करने की कोशिश की, उसके यही मायने निकाले जा रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि सीएम आवास में उन्होंने जो मंदिर बनवाया था, उसमें अब पूजा नहीं हो रही है।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में सपा पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए जबरदस्त हमला किया था। एक वक्त ऐसा आया जब चुनाव विकास के बजाय कब्रिस्तान- श्मशान, ईद-दिवाली पर बिजली में भेदभाव जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो गया था। काम बोलता है...., का नारा देने वाली सपा भाजपा के हमले की काट नहीं ढूंढ पाई। चुनाव ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ा और भाजपा को बड़ी जीत मिली। कमोबेश यही हाल पिछले लोकसभा चुनाव में था।
गुजरात चुनाव में कांग्रेस की रणनीति से सबक लेते हुए विपक्षी दल, खासतौर से सपा 2019 के आम चुनाव से पहले चौकन्नी हो गई है। सपा का जोर गांव, गरीब, किसान, पिछड़ों और दलितों पर है। इस मुद्दे पर भाजपा पर हमला करने में सपा चूकना नहीं चाहती। तभी तो विधानपरिषद में अखिलेश यादव ने कहा, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य पिछड़े वर्ग से आते हैं इसलिए सरकार में उनकी सुनी नहीं जाती है, पंचम तल से उनकी नेम प्लेट हटवा दी गई।