बैठक के बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरमनय नंदा ने मीडिया को बताया कि देश के हालात 1992 में सपा के स्थापना काल से भी भयावह हैं। कार्यपालिका ने लगभग सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं। न्यायपालिका को प्रभावशून्य करने और विधायिका को अपंग करने का काम पूरा कर लिया गया। केंद्र की भाजपा सरकार का लक्ष्य किसी न किसी तरीके से सत्ता में बने रहना और सत्ता हासिल करना रह गया है।
पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई सरकार देशवासियों को लाचार और मजबूर बनाकर अपनी ताकत बढ़ाने में लग गई है। वह सिर्फ पड़ोसी पाकिस्तान के प्रति युद्ध के उन्माद का माहौल बनाकर जनता के प्रति जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है। संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को तहस-नहस करने में लगी हुई है। जो व्यक्ति सरकार की मुखालफत करे, उसे देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है। वोट के लिए दंगे कराना, असांविधानिक कानून बनाना भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरे की घंटी के समान है।
85 फीसदी आबादी से सामाजिक अन्याय
सपा कार्यकारिणी ने प्रस्ताव में कहा है कि देश में नौकरियों की आरक्षण नीति के आधार पर 85 प्रतिशत आबादी को 50 प्रतिशत और 15 फीसदी आबादी को 50 प्रतिशत भागीदारी पाने का अधिकार है। यह सरासर सामाजिक अन्याय है। जनगणना के आंकड़े एकत्र करने केलिए बनाए गए प्रारूप में सभी जातियों की जानकारी प्राप्त करने का कॉलम नहीं है। सपा ने जातियों की गणना कराने की मांग की है।
सपा ने कहा है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर की वजह से पूरे देश में बेचैनी है। इनसे पूरी दुनिया में सरकार की बदनामी हो रही है। दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह गुजरात दंगों की याद दिलाता है। दिल्ली में दंगे के लिए उकसाने वालों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए तो आधी रात उनका तबादला कर दिया गया।
सीमाएं सिकुड़ रहीं, बेरोजगारी चरम पर
सपा ने कहा है कि देश की सीमाएं सिकुड़ रही हैं। आजादी के समय भारत का जितना क्षेत्रफल था, उसमें लाखों वर्गमीटर की कमी आई है। चीन और पाकिस्तान के कब्जे में भारत का बड़ा क्षेत्रफल है। सरकार इसे वापस लेने का प्रयास नहीं कर रही। देश में बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। आउटसोर्सिंग से अस्थायी भर्तियां की जा रही हैं।