समाजवादी पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह की जयंती 23 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की। केंद्र की यूपीए सरकार ने जाटों को आरक्षण देने का ऐलान किया।
भाजपा ने इन फैसलों को चुनावी निर्णय करार देते हुए जाट समाज को सच्चाई बताने का फैसला किया है।
कहा है कि वह जाटों को बताएगी कि वर्ष 2000 में रामप्रकाश गुप्त के मुख्यमंत्रित्व काल में जब जाटों को पिछड़ी जातियों में शामिल करने का फैसला किया गया था तो इन दलों ने विरोध किया था।
दरअसल, लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही सभी सियासी दलों को वोटों की चिंता सताने लगी है। इसीलिए केंद्र को जाटों को आरक्षण देने की चिंता तब सताई जब चुनाव में महज कुछ महीने ही बचे हैं।
सूबे में चूंकि जाटों को आरक्षण पहले से ही प्राप्त है, ऐसे में सपा सरकार के पास आरक्षण देने जैसा औजार तो था नहीं, इसलिए उसने चौधरी चरण सिंह की जयंती पर छुट्टी की घोषणा करके जाटों को जोड़ने की कोशिश की।
मुजफ्फरनगर भी फैक्टर
इन फैसलों के पीछे मुजफ्फरनगर फैक्टर भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। यह बात अब किसी से ढकी-छिपी नहीं रह गई है कि मुजफ्फरनगर को लेकर जाटों में सपा और कांग्रेस से काफी नाराजगी है।
यह तथ्य कांग्रेस और सपा के नेता भी जानते हैं। इसीलिए सपा चौधरी चरण सिंह की जयंती पर अवकाश के जरिये तो कांग्रेस आरक्षण के जरिये जाटों के बीच पैठ बनाना चाहती है।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और किसान जागृति मंच के संयोजक डॉ. सुधीर कुमार मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं।
वे कहते हैं कि मुजफ्फरनगर की घटना के बाद राजनीतिक दलों को लग रहा है कि जाट वोट ‘शिफ्ट’ हो सकता है। इसलिए सपा और कांग्रेस इन्हें अपने-अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा को भी लगता है कि जाट वोट उसकी तरफ भी आ सकता है। इसीलिए भाजपा के नेताओं ने इस बार गन्ना किसानों के आंदोलन में काफी सक्रियता से हिस्सा लिया। मोदी के भाषण में गन्ना व गन्ना किसानों का मुद्दा शामिल रहा।
यूपी में लागू है जाटों को आरक्षण की सुविधा
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्त ने जाटों को पिछड़ी जातियों की सूची में शामिल करके उन्हें आरक्षण का लाभ मुहैया कराया था।
गुप्त के बाद मुख्यमंत्री बने राजनाथ सिंह ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करते हुए पिछड़ी जातियों के आरक्षण में जाटों को आरक्षण का कोटा भी तय कर दिया था। पर, सर्वोच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दायर हुई।
जिस पर उसने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने पर रोक लगा दी। भाजपा ने तब यह दावा भी किया था कि याचिका मुलायम सिंह यादव ने दायर कराई है।
हम बताएंगे सच्चाई
भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि केंद्र का फैसला राजनीतिक है। काफी पहले से जाटों को पिछड़ी जातियों में शामिल करने की मांग चल रही थी।
पर, केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। अब चुनावी लाभ लेने के लिए उसने आनन-फानन में यह फैसला किया।
अभी उसने इस बारे में आयोग से आग्रह किया है। जाहिर है कि जब तक इसे लागू करने की प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि लोगों को पूरी सच्चाई बताई जाएगी।