समाजवादी पार्टी देश के मेधावियों को तेजी से बदलते समय के साथ तकनीक से भी कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए लैपटॉप दे रही है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मेधावियों के घर भेजे लैपटॉप के साथ अपने शुभकामना पत्र में कही है।
लेकिन दिन प्रतिदिन बदल रही टेक्नोलॉजी के बावजूद 2016 के ड्यूल कोर विंडो वाले लैपटॉप मेधावियों को थमाकर समाजवादी लोकप्रियता तो बटोर रही है लेकिन ये सिस्टम आज के दौर में काफी पुराने और धीमे हैं। हाल ही में वर्ष 2020 में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के मेधावियों के घर पहुंच कर सपा जिलाध्यक्ष, सदर विधायक व एमएलसी ने लैपटॉप दिए। मेधावियों को जब यह लैपटॉप मिले तो खुशी जरुर हुई मगर जब उसे ले जाकर देखा तो लैपटॉप के डिब्बे पर ही वर्ष 2016 अंकित था।
ऐसे में वह बोले यह तो पुराना लैपटॉप है। जबकि नई नई तकनीकी दिन प्रतिदिन बदल रही है वहीं नए नए सॉफ्टवेयर आ गए हैं। ऐसे में इस पर काम करना अब बोरिंग सा होगा क्योंकि ये 5 जी के जमाने में तो यह बहुत धीमा साबित होगा और अक्सर हैंग करेगा।
उधर, समाजवादी पार्टी बाराबंकी के जिलाध्यक्ष हाफिज अयाज अहमद ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के ओर से भेजे गए लैपटॉप 10 मेधावियों को दिए गए हैं। इसमें आठ हाईस्कूल व दो इंटरमीडिएट के मेधावी शामिल है। लैपटॉप पुराने इसके बारे में जानकारी नहीं है क्योंकि उन्हें खोल कर नहीं देखा गया ।
चार साल में तकनीकी में आया बड़ा बदलाव
आईटीआई के प्रधानाचार्य दीपक यादव से लैपटॉप की टेक्नोलॉजी के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि दिन प्रतिदिन टेक्नोलॉजी बदल रही है। कंप्यूटर हो मोबाइल हो या लैपटॉप अब नए सॉफ्टवेयर आ गये हैं। ऐसे में अगर बात की जाए 2016 के लैपटॉप की तो उस समय ड्यूल कोर वाले लैपटॉप आ रहे थे जबकि अब आई थ्री, आई 5 व 7 के प्रोसेसर के लैपटॉप आ रहे हैं।
पहले के लैपटॉप की मेमोरी 256 या 500 जीबी तक होती थी। मगर अब यह बढ़कर 1322 तक हो गई है। पहले यूएसबी 2.0 होने से प्रोसेसर की गति होती थी जो अब बढ़ाकर 3.0 कर दी गई है। ऐसे में 4 से 5 साल पुराने लैपटॉप आज के आधुनिकता के समय अधिकांश लोगों ने खारिज कर दिए हैं।