ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समकक्ष बोर्ड खड़ा करने के सवाल पर मौलाना ने कहा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का दायरा शौहर-बीवी व पारिवारिक रिश्तों तक ही सीमित है जबकि हमारे बोर्ड का दायरा असीमित रहेगा। मानव कल्याण बोर्ड कभी धरना-प्रदर्शन नहीं करेगा। सिर्फ बातचीत से मसले हल होंगे। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, वह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में लौटने को तैयार हैं लेकिन पहले यूसुफ मचाला, ओवैसी व कमाल फारूकी को बाहर निकाला जाए।
किसी दबाव में नहीं हटे अयोध्या मसले से पीछे
क्या बातचीत से अयोध्या का हल निकालने की कोशिश से पीछे हटने की वजह किसी तरह का दबाव है? इस सवाल पर उन्होंने कहा, कोई पक्षकार श्रीश्री रविशंकर की बात मानने को तैयार नहीं हो रहा था। अयोध्या के साधु-संत भी उनकी सुन नहीं रहे थे। मुस्लिम पक्षकार भी अड़े थे। ऐसे माहौल में बातचीत कैसे हो सकती है। इसीलिए हमने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना बेहतर समझा। श्रीश्री से हमारा कोई अलगाव नहीं हुआ है। हमारे रास्ते अब भी एक हैं।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में मस्जिद बने लेकिन ये जरूरी नहीं है कि मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर ही हो। उन्होंने इस्लामिक विश्वविद्यालय बनाने की वकालत करते हुए कहा, विवि में हिंदी, उर्दू समेत हर भाषा में मजहब की जानकारी दी जाए।