लखनऊ। साहिर लुधियानवी के जीवन और उनकी प्रेम कहानी को बिल्कुल अलग अंदाज में शुक्रवार शाम संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह के मंच पर उतारा गया। ‘साहिर : हर इक पल का शायर’ की संगीतमय प्रस्तुति देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। चंद्रशेखर वर्मा के लेखन और गोपाल सिन्हा के निर्देशन से सजी इस प्रस्तुति को दर्शकों का अपार प्यार मिला।
मैं पल दो पल का शायर हूं... पंक्तियां साहिर के जीवन-दर्शन को समेटती हैं और इसी पर आधारित नाट्य मंचन ने साहिर की भावनात्मक और वैचारिक दुनिया का अत्यंत संवेदनशील चित्र प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के केंद्र में साहिर लुधियानवी की वह दुनिया थी जिसमें उन्होंने अपना जीवन कविता में जीया। विद्रोह, प्रेम, पीड़ा, विरह और सत्य की अनवरत खोज से धड़कता हुआ जीवन। नाटक ने साहिर की उथल-पुथल भरी, फिर भी कोमल यात्रा को सजीव तरीके से मंच पर उतारा। प्रमुख आकर्षण साहिर द्वारा लिखे गए हिंदी सिनेमा के कालजयी गीतों की सजीव संगीतमय प्रस्तुति रही। कभी कभी मेरे दिल में, मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया और अभी न जाओ छोड़ कर... जैसे गीतों को डॉ. प्रभा श्रीवास्तव और पंकज कुमार ने गाया। संचालन अनुपमा एस. मणि ने किया। मंच पर डॉ. सुधांशु मणि ने साहिर का किरदार निभाया। अन्य भूमिकाओं में रुपाली चंद्रा, चंद्रशेखर वर्मा, अमित हर्ष, आफताब आलम, अनुराधा टंडन, फैज खुमार और रोहित टंडन ने अभिनय किया।
साहिर लुधियानवी के जीवन और उनकी प्रेम कहानी को बिल्कुल अलग अंदाज में शुक्रवार शाम संगीत नाटक अक
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