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Lucknow News: बकाया वेतन की मांग को लेकर सहारा शहर में कर्मचारियों का प्रदर्शन

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प्रदर्शन करते सहारा शहर के कर्मचारी।
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लखनऊ। नगर निगम के सहारा शहर की लीज निरस्त कर वहां रहने वालों को मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार से कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। गेटों को अंदर से बंद कर उन्होंने मेंटेनेंस का काम भी ठप कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सहारा प्रबंधन 2014 से उन्हें आधा-अधूरा वेतन दे रहा है। पीएफ-ग्रेच्युटी भी नहीं दे रहा है। अब कंपनी बंद हो रही है तो उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल अमित अवस्थी ने बताया कि 11 साल से पूरा वेतन नहीं मिला। कंपनी तीन-चार महीने के अंतर पर आंशिक भुगतान करती रही, मगर पूरा भुगतान नहीं किया। पीएफ ग्रेच्युटी भी 11 साल से नहीं दी। कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन सहारा समूह की सेवा में गुजार दिया। सहारा समूह एक परिवार है- इस भावना के बहाने जोड़े रखा गया। अब कोई परिवार दिखाई नहीं दे रहा है।

सुरक्षाकर्मी मंजू तिवारी ने कहा कि वह 25 साल से सहारा से जुड़ी हैं, लेकिन कई साल से वेतन नहीं मिला। सेविका गीता का आरोप है कि अधिकारी यहां का सामान बेच रहे हैं लेकिन कर्मचारियों को भुगतान नहीं कर रहे। कर्मचारियों ने श्रम विभाग और सरकार से बकाया दिलाने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। इस बीच, कर्मचारियों ने बताया कि सहारा शहर में रह रहीं स्वर्गीय सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना रॉय भी बृहस्पतिवार शाम को यहां से निकल गईं।
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1,200 कर्मचारी कर रहे काम



कर्मचारी अमित अवस्थी ने बताया कि सहारा शहर में चपरासी से लेकर अधिकारी और ठेका कर्मियों समेत करीब 1,200 कर्मचारी काम करते हैं। उनका कहना है कि जब तक वेतन नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। अभी गेटों पर ताला नहीं जड़ा गया है और न ही पानी-बिजली बाधित की गई है। कहा कि इस समय सहारा परिवार को कोई सदस्य यहां नहीं रह रहा है। जो रह रहे थे, वह छोड़कर चले गए। कर्मचारी ही यहां रह गए हैं।



दो दिन में होगी सीलिंग



नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि सहारा शहर के कुछ कर्मचारी मिलने आए थे। वे बकाया वेतन का हवाला देकर सीलिंग टालने की मांग कर रहे थे। उनकी बात सुनी गई, लेकिन कोई आश्वासन नहीं दिया गया। बुधवार को तीन दिन का समय दिया गया था, लिहाजा रविवार या सोमवार को सीलिंग की कार्रवाई होगी।

प्रदर्शन करते सहारा शहर के कर्मचारी।

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