लखनऊ। ग्रीन कॉरिडोर निर्माण के लिए निशातगंज पुल से हनुमान सेतु तक 100 से ज्यादा पेड़ों की बलि ली जा चुकी है। इतने ही और कटने हैं। इनमें से दर्जन भर से अधिक पेड़ 50 साल से ज्यादा पुराने थे। इस बात से निशातगंज व न्यू हैदराबाद के निवासी बेहद दुखी हैं।
उन्होंने सवाल उठाए हैं कि विकास का खाका खींचते समय इन पेड़ों को बचाने के लिए सोचा क्यों नहीं गया। तकनीक और तरक्की के दौर में पेड़ों को बचाने के प्रयास होते तो अफसरों का बौद्धिक विकास भी दिखता। पेड़ों के कटने से उनके घर के सामने की रौनक तो गई ही, भीषण गर्मी में ठंडी हवा की उम्मीद भी खत्म हो गई। शुद्ध हवा का संकट भी बढ़ेगा। इतने पुराने पेड़ पाने में 20-25 साल लग जाएंगे। इन्हें बचाया जाना चाहिए।
ये पेड़ हमारे बुजुर्गों जैसे थे। इन्हें कटने से रोकने के लिए पिछले 10 दिनों में सारे सरकारी महकमों के दरवाजे खटखटा कर देख लिए, लेकिन मदद नहीं मिली। अगर ये चौड़ीकरण सड़क की दूसरी पटरी पर होता तो कम पेड़ों की बलि चढ़ती। इन्हें बचाने की हम सभी स्थानीय नागरिकों की कोशिश नाकाम हुई।
- हृदय नारायण बाजपेई, अध्यक्ष, रिवर फ्रंट अपार्टमेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
काटने से पहले वहां लगाए क्यों नहीं
सड़क निर्माण के बारे में सोचा गया, लेकिन पेड़ों के संरक्षण पर किसी का ध्यान नहीं गया। माना कि पांच साल पहले सड़क निर्माण की योजना बनाई गई होगी तो उस समय पेड़ लगाने के बारे में क्यों नहीं सोचा गया। योजना बनाते समय काटे जाने वाले पेड़ों के पीछे पेड़ क्यों नहीं लगाए गए। -मोहित
बड़े होने की निशानी खत्म हो गई
पहली बार इस क्षेत्र में इतनी बढ़ी संख्या में पेड़ों कटाई देखी है। सड़क किनारे एक बरगद का पेड़ था, जो बहुत पुराना और छायदार था। बचपन में गर्मी के समय उसी पेड़ की छांव में खेलते थे। अब तो पेड़ कटने के साथ मानों बड़े होने की निशानी भी खत्म हो गई। - हिमांशु कुमार
आहत हूं... काश कुछ कर पाते
10 साल से यहां हूं। निशातगंज पुल की तरफ से आने वाले रास्ते पर छांव होती थी। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटने से सड़क सुनी लग रही है। मन बहुत आहत है कि कुछ कर नहीं पा रहा। अफसरों को हमारे बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। - सहदेव सिंह
भविष्य में दिखेगा असर
बड़ी संख्या में पेड़ की कटाई हुई है। भविष्य में इसका प्रभाव जरूर देखने को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इसका विरोध जरूर है। यह आवाज सरकार तक पहुंचे और भविष्य के विकास में पर्यावरण बचाने की मुहिम शुरू हो। - अनामिका