निगोहां के दखिना टोल प्लाजा पर रविवार दोपहर रायबरेली के बछरावां से भाजपा विधायक राम नरेश रावत ने जमकर हंगामा किया। टोल प्रबंधक का आरोप है कि विधायक टोल प्लाजा पर अपनी व परिचितों की 250 गाड़ियों के फ्री में आने-जाने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। इनकार पर उनके समर्थक भड़क गए और टोल प्रबंधक व उनके कर्मचारियों से मारपीट शुरू कर दी।
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- फोटो : अमर उजाला
स्टाफ ने किसी तरह भागकर जान बचाई। पूरा घटनाक्रम टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया है। टोल प्रबंधक धीरज कुमार श्रीवास्तव ने निगोहां थाना पहुंचकर तहरीर दी। सीओ सैयद नईमुल हसन का कहना है कि विधायक की ओर से भी तहरीर मिली है। दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कर मामले की गहनता से जांच की जा रही है। मारपीट व हंगामे की घटना दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई।
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टोल के कर्मचारियों ने बताया कि विधायक राम नरेश रावत अपने 20-25 समर्थकों के साथ ऑफिस पहुंचे और प्रबंधक को करीब 250 वाहनों के नंबर की एक सूची सौंपी। विधायक का कहना था कि उक्त सूची में उनकी व परिचितों और कार्यकर्ताओं की गाड़ियों के नंबर है, जिन्हें अक्सर लखनऊ आना-जाना होता है। उन्होंने सूची में शामिल वाहनों से टोल शुल्क न वसूलने के लिए कहा। प्रबंधक का कहना है कि उन्होंने विधायक के साथ आने वाले वाहनों को निशुल्क करने को कहा। बाकी वाहनों के लिए उन्होंने मना कर दिया।
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आरोप है कि इस पर विधायक के समर्थक गाली-गलौज और हंगामा करने लगे। समर्थकों ने टोल प्रबंधक को कुर्सी से खींचकर पीटना शुरू कर दिया। अन्य अधिकारी व कर्मचारियों से भी मारपीट की गई। कुछ कर्मचारी टोल पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास मदद के लिए पहुंचे लेकिन, सत्तापक्ष का मामला होने के चलते वे मूकदर्शक बने रहे। इस बीच विधायक के समर्थकों ने टोल के कार्यालय में जमकर मारपीट की। करीब आधा घंटा अराजकता मचाने के बाद सभी टोल के अधिकारियों-कर्मचारियों को धमकाते हुए चले गए। इसके बाद प्रबंधक धीरज कुमार श्रीवास्तव ने थाना पहुुंचकर विधायक व उनके समर्थकों के खिलाफ तहरीर दी। प्रबंधक का कहना था कि विधायक के साथ आए महेंद्र रंजन, राजा गुप्ता, प्रवेश वर्मा, उज्ज्वल सिंह पटेल समेत आठ-10 लोगों ने मारपीट की थी। उन्होंने मारपीट की वीडियो फुटेज भी पुलिस को सौंपी है, जिसमें विधायक और उनके समर्थक नजर आ रहे हैं।
छूट मांगने पर समर्थक को पीटा, मदद के लिए पहुंचे थे
विधायक राम नरेश रावत का कहना है कि उनका एक समर्थक राजकुमार गुप्ता उर्फ भल्लू लखनऊ से अपनी कार से जा रहा था। उसके साथ कुछ अनुसूचित जाति के लोग भी थे। उसने टोल प्लाजा पर स्थानीय होने के नाते छूट मांगी, जिस पर वहां के कर्मचारियों ने मना कर दिया। यही नहीं, उसकी गाड़ी रोककर उसे पीटा। जातिसूचक शब्द कहे और कार तोड़ डाली। उसने फोन कर मदद मांगी तो वह सहंगों में एक बैठक कर रहे थे। वह कार्यकर्ता की मदद के लिए मौके पर पहुंचे थे। टोलकर्मियों ने कार्यकर्ता को पीटा और उसकी गाड़ी तोड़ दी जो बहुत ही गलत है।