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यूपी विधानसभा में हंगामा, निराश राज्यपाल वापस लौटे

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विधानमंडल के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में शुक्रवार को राज्यपाल नाईक के अभिभाषण पर भाजपा को छोड़ अन्य विपक्षी दलों ने जबर्दस्त हंगामा किया। उन्होंने ‘राज्यपाल वापस जाओ’ और सरकार विरोधी नारे लगाए, बैनर और प्लेकार्ड्स लहराए। एक सदस्य ने कागज भी उछाला।
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हंगामे के चलते राज्यपाल पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ पाए। शोर-शराबे के बीच राज्यपाल अभिभाषण के शुरुआती कुछ पन्ने तथा अंतिम पैरा पढ़ने के बाद लौट गए।

राज्यपाल के विधानसभा में पहुंचते ही विपक्षी सदस्य सीटों पर खड़े होकर नारे लिखे बैनर व तख्तियां लहराते हुए ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे लगाने लगाने लगे। राज्यपाल सदस्यों से अपनी जगह बैठने का अनुरोध करते रहे, लेकिन शोर-शराबा जारी रहा।

11.04 बजे नाईक ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया तो भी हंगामा व नारेबाजी जारी रही। बसपा सदस्यों ने नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य और विधान परिषद में नेता विरोधी दल नसीमुद्दीन सिद्दीकी की अगुवाई में विरोध की शुरुआत की। बसपा सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारे लिखी टोपियां लगा लीं और बैनर लहराने शुरू कर दिए।
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हंगामे के बीच राज्यपाल ने अभिभाषण जारी रखा

कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और पीस पार्टी के सदस्यों ने भी प्लेकार्ड्स व बैनर दिखाने शुरू कर दिए। नारेबाजी और हंगामे के बीच राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ना जारी रखा।

इस दौरान कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन की तरफ बढ़ने की कोशिश की तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। हंगामा बढ़ने पर राज्यपाल को अभिभाषण बीच में रोकना पड़ा। इस दौरान भाजपा के सदस्य सदन में चुपचाप बैठे रहे।

पहले 10 पन्ने और आखिरी पेज पढ़ा
राज्यपाल ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच 110 पेज के अभिभाषण के पहले 10 पन्ने और आखिरी पन्ना पढ़ा। करीब 18 मिनट तक अभिभाषण पढ़कर राज्यपाल 11.24 बजे सदन से चले गए।

पिछले कई सत्रों में यह पहला मौका है जब राज्यपाल ने इतनी देर तक अभिभाषण पढ़ा। इस दौरान उनका स्वास्थ्य खराब होने का असर दिख रहा था। उन्होंने दो बार पानी पिया।

इन मुद्दों पर विपक्ष ने किया हंगामा

- कानून-व्यवस्था ध्वस्त, प्रदेश में जंगल राज, आपराधिक वारदातें बढ़ीं, महिलाएं सुरक्षित नहीं।

- दलितों का उत्पीड़न हो रहा, 3 लाख दलित कार्मिकों को पदावनत किया।

- बुंदेलखंड पर खोखले वादे व दावे, हालात खराब, पलायन बढ़ा, भोजन-पानी का संकट।

- चीनी मिल मालिकों व सरकार की मिलीभगत, तीन साल से गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा।

- गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं हुआ, गन्ना मूल्य की पहली किस्त कम की।

- अल्पसंख्यकों को 18 फीसदी आरक्षण का वादा पूरा नहीं, अन्य घोषणाओं पर अमल नहीं।

- ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और सूखा प्रभावित किसानों को राहत नहीं बंटी।

- बिजली संकट, सड़कें बदहाल, नहरों में पानी नहीं।

- भाजपा और सपा में मिलीभगत, दंगा कराने की साजिश।
- सपा सरकार की बर्खास्तगी की मांग।
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सपा-भाजपा एक, करा सकती हैं दंगे

बसपा, कांग्रेस और रालोद ने भाजपा और सपा पर मिलीभगत का आरोप लगाया। सेंट्रल हॉल में मीडियाकर्मियों से बातचीत में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि सदन में सरकार के अभिभाषण का समर्थन करके भाजपा ने इसे साबित कर दिया है।

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप माथुर ने कहा कि सपा और भाजपा का गठबंधन खुलकर सामने आ गया है। दोनों मिलकर दंगे कराना चाहते हैं।

रालोद के वीरपाल राठी ने कहा कि सदन में जो कुछ हुआ उससे साफ हो गया कि भाजपा-सपा एक हैं। इन दोनों दलों ने ही मुजफ्फरनगर व अन्य स्थानों पर दंगे कराए थे।
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