हालांकि, प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद हुई पहली बैठक में सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर बातचीत हुई थी। तय हुआ था कि राज्य और जिला स्तर पर समन्वय समितियां बनेंगी। कुछ जगहों पर ये समितियां बनी भी लेकिन बहुत प्रभावी नहीं रही। बैठक में इन समितियों को प्रभावी बनाने पर बातचीत होगी। साथ ही इस पर भी चर्चा होगी कि स्थानीय मुद्दों को सुलझाने और सरकार तथा संगठन के बीच किस तरह और बेहतर संवाद बनाया जा सकता है।
निकाय चुनाव में कुछ मंत्रियों के क्षेत्रों में नतीजे काफी चिंताजनक रहे हैं। कई जगहों से स्थानीय स्तर पर मंत्रियों द्वारा संगठन से तालमेल न रखने और कार्यकर्ताओं की न सुनने की शिकायतें संघ को मिली हैं। कई विधायकों और सांसदों की तरफ से भी सरकार के मंत्रियों द्वारा उनकी बात न सुनने की शिकायतें उठती रही हैं। अधिकारियों की मनमानी और कार्यकर्ताओं की ही नहीं बल्कि विधायकों व सांसदों की बात भी न सुनने के मामले संघ नेतृत्व की जानकारी में हैं।
सके चलते कुछ मंत्रियों की भूमिका में फेरबदल, कुछ की तरक्की तो कुछ के मौजूदा विभागों को बदलकर उनका कद घटाने की चर्चा सियासी गलियारों में चल रही है। साथ ही संकेत मिल रहे हैं कि संगठन और सरकार मेें कुछ पदों पर कार्यकर्ताओं के समायोजन पर सहमति बन गई है। कई स्थानों की सूची बन गई है। जानकारी के मुताबिक, बैठक में इन सब मसलों पर बातचीत होगी। भाजपा संगठन के पुनर्गठन पर भी बातचीत होने की संभावना है।