प्रधानमंत्री मोदी का सपना सच करने के लिए संघ खुद आगे आ गया है। संघ ने एक ऐसे ही मुद्दे पर काम करने का फैसला किया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा की सफाई के सपने को साकार करने में जुटने का फैसला किया है। हालांकि वह पर्दे के पीछे रहेगा।
सामने होंगी नदियों के संरक्षण पर काम करने वाली संस्थाएं और विशेषज्ञ। इनके साथ जोड़े जाएंगे समाज के लोग, विशेष तौर से उन इलाकों के लोग जो गंगोत्री से गंगासागर तक इस नदी के किनारे रहते हैं। रणनीति भी विविध आयामी होगी।
इसमें समाज को जगाने का अभियान होगा तो नदियों में गंदगी रोकने के लिए चौकीदारी का काम भी। समाज को जगाने के काम होंगे तो शासन पर दबाव बनाने वाले भी। इसके लिए 28 सितंबर को यहां बैठक बुलाई गई है।
असली मकसद तो कुछ और ही है
संघ जानता है कि गंगा के सहारे वह न सिर्फ इस नदी के किनारे स्थित इलाकों में, बल्कि देश भर के लोगों को जोड़ने का काम कर सकता है। इसीलिए वह चाहता है कि यह संकल्प एक अभियान के रूप में चले।
इस पूरे काम से जुड़े एक वरिष्ठ प्रचारक बताते हैं कि नदियां समाज की संस्कृति का दर्पण मानी जाती हैं। इसीलिए तय किया गया है कि नदियों की सफाई से पहले सामाजिक सफाई जरूरी है।
सिर्फ कानून बनाकर उद्योगों के कचरे और गंदगी को नदियों में रोकने से नहीं रोका जा सकता। इसीलिए उद्योगपतियों से भी इस काम में सहयोग लेने की बात सोची जा रही है।
समाज का जागरण हो, शासन पर दबाव बने तथा उद्योग सहयोग करें- बैठक का एजेंडा इन तीन बिंदुओं मुख्य रूप से केंद्रित रहेगा। गंगा के सहारे सभी नदियों में निर्मल और अविरल धारा की चिंता इस बैठक का उद्देश्य है।
ये लोग होंगे शामिल
बैठक का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मधुभाई कुलकर्णी खुद इसमें मौजूद रहेंगे।
वहीं गंगोत्री से गंगासागर तक प्रशासनिक दृष्टि से पांच और सांगठनिक दृष्टि से 12 प्रांतों के प्रचारकों व संघ से जुडे़ संगठनों के प्रमुखों के साथ ही चार क्षेत्र प्रचारक भी इसमें हिस्सा लेंगे।
इसके अलावा भाजपा के ‘मां गंगा समग्र’ प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय से लेकर प्रांतीय पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है। अनिल माधव दवे, आशीष जैन, आशीष गौतम समेत नदियों के संरक्षण व सफाई के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे।