राममंदिर पर फैसला आने के बाद पहली बार प्रतिनिधि सभा की बैठक होने जा रही है। तय व्यवस्था के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में संघ परिवार के सभी संगठनों में महामंत्री (संगठन) और अन्य प्रमुख पदों को संभालने वाले हिस्सा लेते हैं। जो प्रतिनिधि सभा को अपनी वर्षभर की गतिविधियों की जानकारी देते हैं और आगे की योजनाओं व कार्यक्रमों पर संघ नेतृत्व के साथ चर्चा करते हैं।
भले ही संघ नेतृत्व को समय-समय पर अनौपचारिक और औपचारिक रूप से मंदिर निर्माण को लेकर चल रही गतिविधियों की जानकारी मिलती रही हो, लेकिन प्रतिनिधि सभा के सभी प्रतिनिधियों को पहली बार इस मुद्दे पर अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी जाएगी।
विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय जो ट्रस्ट के भी महामंत्री हैं वह और उनके अलावा विहिप के महामंत्री (संगठन ) भी बैठक में शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक, इनके साथ न सिर्फ अयोध्या पर चर्चा होगी बल्कि काशी और मथुरा सहित हिंदुत्व के सांस्कृतिक स्थलों के विकास व मठ-मंदिरों के विकास पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा प्रदेश में गौवंश संरक्षण व धर्मान्तरण जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
विश्व हिंदू परिषद ने पिछले दिनों सामाजिक समरसता पर फोकस करते हुए छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाने की योजना बनाई है। पर, अब संघ परिवार अयोध्या के राममंदिर के सहारे भी सामाजिक समरसता के सरोकारों को आगे बढ़ाकर इसके सहारे सियासी गणित को और दुरुस्त करना चाहता है। जिसकी शुरुआत ट्रस्ट में अनुसूचित जाति के एक प्रतिनिधि को रखने के साथ हो चुकी है।