समाजवादी पार्टी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को एकपक्षीय और विवादित बताया है जिसमें उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की बात कही है। सपा के प्रदेश प्रवक्ता और मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि संघ प्रमुख को न्यायतंत्र पर भरोसा नहीं है।
दुनिया को मालूम है कि अयोध्या मुद्दा अदालत में विचाराधीन है, फिर भी उन्होंने बयान देकर सांप्रदायिकता भड़काने और अशांति व अराजकता फैलाने का काम किया है।
चौधरी ने कहा, ‘गर होंगे बदनाम तो क्या नाम न होगा’ की तर्ज पर आरएसएस प्रमुख को विवादित बयान देने का मर्ज है। बर्र के छत्ते को छेड़कर वे क्या हासिल करते हैं, यह जांच का विषय हो सकता है।
उन्होंने कहा, सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का स्पष्ट मत है कि यह देश आस्था से नहीं, संविधान से चलेगा। आरएसएस का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान से कोई वास्ता नहीं रहा है। संघ की विचारधारा हिटलर के नाजीवाद से प्रभावित है। वह तानाशाही तरीके से देश को चलाने का मंसूबा रखता है।
कट्टरपंथी निरंकुशता के प्रवर्तक बनना चाहते हैं संघ प्रमुख
सपा प्रवक्ता के अनुसार, इसी के तहत ही 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया था।
सपा प्रवक्ता ने कहा, आरएसएस प्रमुख ने समाज में टकराव और असहिष्णुता बढ़ाने वाला बयान देकर यह जता दिया है कि वे अनेकता में एकता के बजाय कट्टरपंथी निरंकुशता के प्रवर्तक बनना चाहते हैं।
लोग अमन-चैन से मिल-जुलकर रहे यह उन्हें गंवारा नहीं, इसलिए संघ से जुड़े लोग भड़काऊ भाषण देकर माहौल में उत्तेजना फैलाने की साजिशें रचते रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में तो सपा सरकार बनने के पहले दिन से ही अयोध्या, मुजफ्फरनगर, मेरठ, कांठ, मथुरा में संघ-भाजपा के लोग अशांति फैलाने में लग गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के प्रति जनता के गहरे विश्वास के कारण वे अपने षड्यंत्रों में सफल नहीं हो सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अशांति, अराजकता और असहिष्णुता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।