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सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या पर फैसले के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दौरे भी स्थगित

Wed, 30 Oct 2019 03:48 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ - फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के संभावित फैसले के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कार्यक्रमों और बैठकों के स्थगन के साथ ही प्रचारकों के दौरे भी स्थगित करने का फैसला किया है। सभी प्रचारकों को 17 नवंबर तक अपने-अपने निर्धारित केंद्रों पर रुकने को कहा गया है। 
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लखनऊ में 17 नवंबर से प्रस्तावित ‘एकल कुंभ’, अयोध्या में 4 नवंबर से आयोजित दुर्गा वाहिनी के शिविर और प्रदेश में विहिप के त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रमों को स्थगित करने के बाद अब हरिद्वार में 31 अक्तूूबर से 4 नवंबर तक देश भर के संघ से जुड़े सभी संगठनों में काम करने वाले प्रचारकों की प्रस्तावित बैठक भी स्थगित करने का फैसला किया गया है।

संघ की इस तरह की बैठक प्रत्येक पांच वर्ष पर होती है। पर, बदली परिस्थितियों में जिस तरह संघ ने इस महत्वपूर्ण बैठक को भी स्थगित करने का फैसला किया है, उससे अयोध्या मुद्दे पर संभावित फैसले के मद्देनजर उसकी चिंताओं और चुनौतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
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संघ के सूत्रों का कहना है कि प्रचारकों से कहा गया है कि वे उन्हीं स्थानों पर रुकें जहां संगठन की तरफ से उनका केंद्र निर्धारित किया गया है। बहुत जरूरी होने पर और यदि संगठन निर्देश देता है तभी अपना केंद्र छोड़ें।

अलबत्ता संघ का शीर्ष नेतृत्व इस फैसले से मुक्त रहेगा। संघ ने संगठन में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले प्रचारकों के लिए देश में अलग-अलग स्थानों पर केंद्र तय कर रखे हैं। वहां से वे संबंधित क्षेत्रों में संगठन के कामों का पर्यवेक्षण और विस्तार करते हैं।
 
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वजह यह तो नहीं

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन को अंतिम चरण पर पहुंचाने और इसके जरिये हिंदुत्व को भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु बनाने में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मामला चाहे ताला खोलने से पहले रथयात्राएं निकालकर इस मुद्दे पर समाज में जनजागरण करने का रहा हो या कारसेवा के बाद कांग्रेस व सपा सरकारों को घेरने का। 

सभी जगह संघ ने अपने सांगठनिक कौशल और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या की बदौलत हिंदुओं की ताकत का संदेश देने में भूमिका निभाई। इसलिए अब जब मंदिर मुद्दे पर फैसला आने की संभावना है तो संघ को उसके मद्देनजर खुद से जुड़े संगठनों के जरिये लोगों को आगे के लिए तैयार करने की चिंता करनी ही होगी। 

शायद इसीलिए बैठकें स्थगित करने के साथ ही प्रचारकों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की संभावित समय सीमा 17 नवंबर तक अपने-अपने केंद्रों पर रुकने को कहा गया है ताकि किन्हीं तात्कालिक परिस्थितियों के मद्देनजर भविष्य की रणनीति तय करके उसे तुरंत जमीन पर उतारा जा सके। 
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