अयोध्या मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के संभावित फैसले के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कार्यक्रमों और बैठकों के स्थगन के साथ ही प्रचारकों के दौरे भी स्थगित करने का फैसला किया है। सभी प्रचारकों को 17 नवंबर तक अपने-अपने निर्धारित केंद्रों पर रुकने को कहा गया है।
लखनऊ में 17 नवंबर से प्रस्तावित ‘एकल कुंभ’, अयोध्या में 4 नवंबर से आयोजित दुर्गा वाहिनी के शिविर और प्रदेश में विहिप के त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रमों को स्थगित करने के बाद अब हरिद्वार में 31 अक्तूूबर से 4 नवंबर तक देश भर के संघ से जुड़े सभी संगठनों में काम करने वाले प्रचारकों की प्रस्तावित बैठक भी स्थगित करने का फैसला किया गया है।
संघ की इस तरह की बैठक प्रत्येक पांच वर्ष पर होती है। पर, बदली परिस्थितियों में जिस तरह संघ ने इस महत्वपूर्ण बैठक को भी स्थगित करने का फैसला किया है, उससे अयोध्या मुद्दे पर संभावित फैसले के मद्देनजर उसकी चिंताओं और चुनौतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
संघ के सूत्रों का कहना है कि प्रचारकों से कहा गया है कि वे उन्हीं स्थानों पर रुकें जहां संगठन की तरफ से उनका केंद्र निर्धारित किया गया है। बहुत जरूरी होने पर और यदि संगठन निर्देश देता है तभी अपना केंद्र छोड़ें।
अलबत्ता संघ का शीर्ष नेतृत्व इस फैसले से मुक्त रहेगा। संघ ने संगठन में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले प्रचारकों के लिए देश में अलग-अलग स्थानों पर केंद्र तय कर रखे हैं। वहां से वे संबंधित क्षेत्रों में संगठन के कामों का पर्यवेक्षण और विस्तार करते हैं।