प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कामों को बेहतर तरीके से कराने के लिए
उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (यूपीआरआरडीए) के सीईओ के अधिकार
बढ़ाए जाएंगे।
इस योजना को लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग
के माध्यम से लागू किया जा रहा है लेकिन दोनों ही विभागों के इंजीनियरों की
ढिलाई पर अंकुश लगाने के लिए यूपीआरआरडीए को कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि पीडब्ल्यूडी में पीएमजीएसवाई
की अलग विंग ही है। इसमें सर्किल स्तर से लेकर मुख्यालय तक एक्सईएन, एसई
और चीफ इंजीनियर तैनात किए जाते हैं।
ज्यादातर जिलों में बजट जारी होने के
बावजूद कार्य की प्रगति बेहद धीमी है। इनमें लक्ष्य का बीस फीसदी काम भी
अभी तक नहीं हुआ है जबकि चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने को है।
मुख्य
सचिव की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में यूपीआरआरडीए के
अफसरों ने अपनी समस्याएं रखी।
उन्होंने कहा कि काम नहीं करने वाले
इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है। वहीं
अभिकरण की भूमिका महज बजट देने तक ही सीमित रह गई है।
इस
पर बैठक में तय हुआ कि दोनों कार्यदायी संस्थाओं के पीएमजीएसवाई सेल में
काम करने वाले इंजीनियरों की चरित्र पंजिका पर कलम चलाने का अधिकार
यूपीआरआरडीए के सीईओ को दिया जाएगा।
लेकिन आचार संहिता की वजह से अभी यह
व्यवस्था लागू नहीं हो सकती। चुनाव बाद इस पर अमल होगा।
बैठक में
यूपीआरआरडीए के सीईओ अनुज कुमार झा और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता
(ग्रामीण सड़क) एके गुप्ता भी मौजूद थे।