लखनऊ। यूनिसेफ ने रोजा इफ्तार को सांस्कृतिक विरासत के तौर पर शामिल किया है। इस विरासत से सामाजिक सौहार्द और एकता को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ट्रस्ट के चेयरमैन अब्दुल नसीर ने कहा कि यह खुशी की बात है कि रोजा इफ्तार एक विरासत के रूप में है। यहां गरीब और अमीर के बीच कोई भेद नहीं। एक साथ सभी बैठकर रोजा इफ्तार करते हैं। इससे एक-दूसरे प्रति प्यार, सम्मान और भेदभाव खत्म होता है।