फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी चुनाव: अबकी किसका छत्र संवारेंगे क्षत्रिय

Mon, 16 Jan 2017 12:21 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
यूपी इलेक्शन
विज्ञापन
पुराने जमाने से क्षत्रिय शासक वर्ग माना जाता रहा है। सामंती परंपरा खत्म होने और दूसरी जातियों में अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद ठाकुरों का प्रभाव कायम है। 
विज्ञापन


सूबे की आबादी में करीब आठ फीसदी हिस्सेदारी होने के बावजूद सामजिक-आर्थिक समीकरण में बाहुबल और धनबल से संपन्न होने के चलते ठाकुर बिरादरी सियासत में सबसे ज्यादा दखल दखने में सफल होती है। 

सियासी समीकरण के बदलाव का ये सबसे पहले अनुमान लगा लेते हैं। खंडित जनादेश वाली सरकारों में समीकरण बनाने-बिगाड़ने की क्षमता का नमूना ये कई बार दिखा चुके हैं। इस बार भी नजरें इन पर टिकी हुई हैं।
विज्ञापन


चुनाव विश्लेषक और ‘बैटल ग्राउंड यूपी: द लैंड ऑफ राम’ के लेखक राजन पांडेय कहते हैं कि संख्या में कम होने के बावजूद ठाकुर पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं। इनमें तमाम लोग पुराने जमाने में राजा-महाराजा और जमींदार रहे। 

election - फोटो : demo pic
जमींदारी खत्म हुई तो ये सांसद-विधायक बनकर उसी भूमिका में आने लगे। यह नेतृत्व करने वाला वर्ग रहा है, इसीलिए दूसरों पर प्रभाव डालने में सफल रहते हैं। लेकिन इनका किसी एक पार्टी के साथ झुकाव नहीं रहता। 

पिछले चुनाव में बड़ी संख्या में यह वर्ग सपा के साथ था। इस चुनाव में भाजपा की ओर नजर आ रहा है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और साकेत महाविद्यालय फैजाबाद के अवकाश प्राप्त प्राचार्य ठाकुर हरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि ठाकुर प्रबुद्ध वर्ग माना जाता है। 

हमेशा लीडिंग पोजीशन में रहा है। ये परंपरावादी होते हैं और बेहतर व्यक्ति सामने होने पर उसे प्राथमिकता देने में इसे कोई दिक्कत नहीं होती। क्षत्रिय हमेशा देश-काल और परिस्थिति का आकलन कर अपना रुख तय करते हैं। सपा में घमासान के बाद इस बार क्षत्रियों का झुकाव भाजपा की ओर नजर आ रहा है।

भाजपा में ठाकुरों की दस्तक हुई तेज

डेमो प‌िक
सपा की कलह से सियासी भविष्य की अनिश्चितता का आलम यह है कि सपा सरकार में मंत्री रहे राजा महेंद्र अरिदमन सिंह भाजपा के पाले में पहुंच गए हैं। 

सपा ने राजा और उनकी पत्नी पक्षालिका सिंह को आगरा की अलग-अलग सीटों पर प्रत्याशी बनाया था। मगर, पार्टी में दो फाड़ से बेचैन राजा ने पाला ही बदल लिया है। ठाकुर दलवीर सिंह राष्ट्रीय लोकदल के विधानमंडल दल के नेता हैं। कुछ दिन पहले वे भी भाजपा की शरण में पहुंच चुके हैं। 

सपा के एमएलसी रहे देवेंद्र प्रताप सिंह पहले ही भाजपाई हो चुके हैं। भाजपा उन्हें एमएलसी प्रत्याशी भी घोषित कर चुकी है। बसपा विधायक महावीर सिंह राणा भी भाजपा का दामन थाम चुके हैं। गोंडा में कर्नलगंज से विधायक रहे अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भइया ने भी भाजपा में घर वापसी कर ली है। लोकसभा में बड़ी संख्या में ठाकुर सांसद भाजपा से पहुंचे हैं।

कभी वीर बहादुर, वीपी, अब राजनाथ ही सबसे बड़ा चेहरा

राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala
प्रदेश में कभी पूर्व मुख्यमंत्री रहे वीर बहादुर सिंह और पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह ठाकुरों के नेता हुआ करते थे। 

मौजूदा दौर में गृहमंत्री राजनाथ सिंह सूबे में ठाकुरों के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। एक जमाने में अमर सिंह का भी क्षत्रिय समाज में बड़ा दखल हुआ करता था। 

मगर, अब प्रभाव सीमित होता नजर आ रहा है। हालांकि क्षत्रियों की दूसरी लाइन तेजी से उभर रही है और प्रतापगढ़ के दबंग क्षत्रिय नेता और स्टांप पंजीयन मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया नई पीढ़ी की अगुवाई करते नजर आ रहे हैं।

देखें पार्ट‌ियों के बड़े चेहरे

election
भाजपा में बड़े ठाकुर चेहरे
- राजनाथ सिंह, गृहमंत्री
- वीके सिंह, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री व पूर्व थल सेना अध्यक्ष
- महंत आदित्यनाथ, सांसद गोरखपुर
तेजी से उभर रहे चेहरे
- महेंद्र सिंह, राष्ट्रीय सचिव
- सुरेश राणा, विधायक
- संगीत सोम, विधायक
- स्वाती सिंह, प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा

कांग्रेस : बड़े चेहरे
- संजय सिंह, राज्यसभा सांसद
- रत्ना सिंह, पूर्व सांसद
तेजी से उभर रहे चेहरे
- अखिलेश सिंह, विधायक
- दीपक सिंह, एमएलसी

सपा : बड़े चेहरे
- अमर सिंह, राज्यसभा सांसद
- नीरज शेखर, राज्यसभा सांसद
तेजी से उभर रहे चेहरे
- ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री
- अरविंद सिंह गोप, ग्राम्य विकास मंत्री
- यशवंत सिंह, एमएलसी

बसपा : बड़े चेहरे
- ठा. जयवीर सिंह, पूर्व मंत्री
तेजी से उभर रहे चेहरे
- उमाशंकर सिंह, विधायक
- जितेंद्र कुमार सिंह बबलू, पूर्व विधायक
विज्ञापन

घट रही ठाकुरों की भूमिका : सिंह

elections - फोटो : DEMO PIC
क्षत्रिय महासभा (भारत) के प्रमुख प्रचारक राधा मोहन सिंह कहते हैं कि ठाकुरों ने अपनी अहमियत खुद कम की है। व्यक्तिगत लाभ देखकर ये इधर-उधर होते रहते हैं। 

एक दल से दूसरे दल में जाने वाले सबसे ज्यादा यही होते हैं। इससे समाज की छवि खराब हो रही है। शायद यही वजह है कि  विधानसभा के चुनावों में इनकी भागीदारी घट रही है। 

क्षत्रियों को व्यक्तिगत हित छोड़कर समाज व राष्ट्र के हित को ध्यान में रखकर वहां रहना चाहिए, जहां मान-सम्मान मिलता हो। बसपा टिकटों का एलान कर चुकी है। भाजपा के टिकटों के एलान का इंतजार है। सपा की तस्वीर अभी साफ नहीं है। जब सभी पार्टियों के टिकट आ जाएंगे तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन कहां जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें