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रोबोटिक तकनीक से आसान हुई लंग कैंसर की सर्जरी, देर से पता चलने के कारण मरीज को बचाना चुनौतीपूर्ण

Sun, 05 May 2019 01:19 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Robotic Surgery
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अब फेफड़े के कैंसर के ऑपरेशन की नई तकनीक आ गई है। दूरबीन विधि के साथ ही रोबोटिक सर्जरी के जरिये भी इसका ऑपरेशन किया जा रहा है, लेकिन इसका देर से पता लगना सबसे बड़ी चुनौती है। ये बातें कोकीला बेन अस्पताल मुंबई के सर्जन डॉ. राजेश मिस्त्री ने कही।
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वह शनिवार को केजीएमयू में नॉन स्माल सेल लंग कैंसर विषय पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लंग कैंसर के बोरे में देर से जानकारी मिलती है। यह सबसे बड़ी चुनौती है। इस दौरान केजीएमयू वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट ने धूम्रपान से होने वाले नुकसान के प्रति आम लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।

इस दौरान सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि फेफड़े के कैंसर का शुरुआती चरण में ऑपरेशन करके राहत दी जा सकती है। केजीएमयू में दूरबीन विधि से बिना दर्द के यह ऑपरेशन किया जा रहा है। इस दौरान डॉ. नीरज रस्तोगी, लोहिया के डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. नुजहत हुसैन, डॉ. कुमार नरवेश भी मौजूद थे।
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लगातार सांस फूले तो सीटी स्कैन कराएं
केजीएमयू के डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि खांसी आने के साथ ही सांस फूले, खांसी में खून आए, वजन घटे तो एक्स-रे कराना चाहिए। एक्स-रे और बलगम के जरिये टीबी के बारे में पता चलता है। बलगम जांच निगेटिव है और दो सप्ताह दवा लेने पर भी फायदा नहीं हो रहा है तो मरीज को सीटी स्कैन कराना चाहिए। इससे लंग की स्थिति की जानकारी मिल जाती है। कैंसर के प्राथमिक लक्षण भी दिख जाते हैं। इसके अलावा ब्रांकोस्कोपी से भी लंग कैंसर के बारे में जानकारी मिल जाती है।

लिवर और बोन पर को करता है प्रभावित
केजीएमयू के डॉ. शिवरंजन ने बताया कि लंग कैंसर फेफड़े के साथ ही लिवर और बोन को भी प्रभावित करता है। लंग कैंसर दो तरह का होता है। पहला नॉन स्मॉल सेल और दूसरा स्मॉल सेल। करीब 70 से 80 फीसदी मामले नॉन स्मॉल सेल के होते हैं। अन्य स्मॉल सेल कैंसर के होते हैं। इस वजह से जब तक इसकी जानकारी मिलती है। यह लिवर, बोन सहित शरीर के विभिन्न हिस्से में पहुंच चुका होता है। ऐसे में मरीज को बचा पाना नामुमकिन हो जाता है।
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