लखनऊ। केजीएमयू में रोबोट की खरीद प्रक्रिया विवादों में आ गई है। टेंडर प्रक्रिया में शामिल एक कंपनी ने खरीद में जेम पोर्टल के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद विजिलेंस ने जांच के आदेश दिए हैं और केजीएमयू प्रशासन से तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।
ऑर्थोपैडिक्स विभाग ने इसी साल मरीजों को आधुनिक जाइंट रिप्लेसमेंट की सुविधा शुरू की है। इसके लिए रोबोटिक आर्म असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट सेट खरीदा था। अब इसकी खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। पांच मई को जेम के सहायक सतर्कता अधिकारी पुष्कर कुमार ने कुलपति को ईमेल कर अनियमितता की शिकायत की थी। इसी के तहत विभाग से तीन दिन में खरीद प्रक्रिया संबंधी जानकारी मांगी गई है।
वहीं, केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया नियमों के तहत निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से की गई। ऑर्थोपैडिक विभाग ने 17 सितंबर 2025 को पत्र के जरिये रोबोटिक आर्म असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट सेट की तकनीकी विशिष्टताएं भेजी थीं। इन्हें बाहरी विषय विशेषज्ञों समेत 16 सदस्यों वाली समिति ने तैयार किया था। 19 फरवरी 2026 को केजीएमयू की 74वीं हाई लेवल परचेज कमेटी ने रोबोट खरीद को मंजूरी दी। सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद आपूर्ति आदेश जारी हुआ। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, रोबोट खरीद की प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष हुई है।