परिवहन निगम का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। परिवहन निगम के लखनऊ परिक्षेत्र की स्थिति खराब है। बसों की संख्या में वृद्घि होने के बावजूद यात्रियों की संख्या कम हुई है। लोड फैक्टर 59 प्रतिशत से घटकर 51 फीसदी पहुंच गया। जबकि बसों की संख्या 963 से बढ़कर 1013 हुई थी। बसें बढ़ने के बाद भी यात्रियों की संख्या कम होना अफसरों की लापरवाही को उजागर करता है।
यह बात शुक्रवार को हुई समीक्षा में सामने आई है। चारबाग, अवध और उपनगरीय डिपो की स्थिति खराब है। यहां पर 50 प्रतिशत से कम यात्री मिल रहे हैं। अधिकारियों की अनदेखी की वजह से 18 फीसदी से अधिक बसें निष्प्रयोज्य हैं। परिवहन निगम ने एक से 27 जुलाई तक की बसों की समीक्षा की है। इसके अनुसार वर्ष 2024 में लखनऊ परिक्षेत्र के पास 963 बसें थीं। इस दौरान करीब 59 फीसदी बसों का लोड फैक्टर था। जबकि साल 2025 में बसों की संख्या बढ़कर 1013 हो गई, लेकिन लोड फैक्टर घटकर 51 फीसदी रह गया। राजधानी में यात्रियों की कमी ने परिवहन निगम अफसरों को चिंतित कर दिया है। अफसरों की मनमानी और लापरवाही के चलते यात्री घट रहे हैं। डग्गामारी नहीं रोकी जा पा रही है। वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष करीब एक प्रतिशत बसें कंडम खड़ी हैं।
लखनऊ रीजन का हाल
डिपो बस लोड फैक्टर
2025 2024 2025 2024
चारबाग 144 124 47 56
अवध 104 107 46 54
कैसरबाग 165 139 54 63
राबयरेली 158 157 48 55
बाराबंकी 99 104 64 67
आलमबाग 84 80 52 57
उपनगरीय 130 122 44 55
कैसरबाग अनुबंधित 129 130 61 68
नोट: लोड फैक्टर का डाटा प्रतिशत में है।