लखनऊ। ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण रोडवेज बसों का किराया बढ़ाने की तैयारी है। अफसरों के सामने किराया बढ़ाना मजबूरी बन गई है। ईंधन महंगा होने से रोडवेज को रोजाना करीब नौ लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
फिलहाल किराये वृद्धि पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, किराया दो रुपये तक महंगा हो सकता है। अफसर आय और व्यय को लेकर मंथन कर रहे हैं। रोडवेज बेड़े में 12 हजार से अधिक बसें हैं। इन बसों से करीब 15 लाख यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। लखनऊ परिक्षेत्र में 1032 बसें संचालित होती हैं। इनके संचालन पर औसतन डेढ़ लाख लीटर डीजल की खपत होती है। पिछले दस दिन में डीजल की कीमतों में साढ़े छह रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे लखनऊ परिक्षेत्र को प्रतिदिन नौ लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। क्षेत्रीय प्रबंधक अमरनाथ सहाय ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के असर की पुष्टि की।
दो रुपये तक बढ़ सकता है किराया
सूत्र बताते हैं कि परिवहन निगम बोर्ड बैठक में किराये वृद्धि का प्रस्ताव रखा जाएगा। मंजूरी के बाद बसों का किराया दो रुपये तक बढ़ सकता है। फिलहाल अफसर इस मुद्दे पर कुछ बोलने से बच रहे हैं।
कैब-टैक्सी ने मनमाने ढंग से बढ़ाया किराया
कैब टैक्सी का भाड़ा एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत बढ़ाया जाता है लेकिन ईंधन की कीमतें बढ़ने पर कैब संचालकों ने इसमें वृद्धि कर ली है। पहले 10 किमी की दूरी तक कैब-टैक्सी 70 रुपये लेती थीं, वहीं अब 90 से 110 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इस संबंध में भारतीय कैब नियंत्रण बोर्ड के अस्थायी अध्यक्ष जाहिद प्रधान ने बताया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने पर अभी कैब टैक्सियों का भाड़ा नहीं बढ़ा है। कैब संचालक की ओर से किराया बढ़ाने का अलर्ट जारी किया जाता है।