पब्लिक वाहनों में महिला यात्रियों से बढ़ती छेड़छाड़ और अपराध को रोकने के लिए कड़ा प्रस्ताव तैयार किया गया है।
अगर पब्लिक वाहन का ड्राइवर अपराध में लिप्त मिलता है या आपराधिक इतिहास रखता है तो सीधे वाहन परमिट निरस्त कर दिया जाएगा। परिवहन विभाग के इस प्रस्ताव में वाहन मालिक पर भी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही नए नियम लागू हो जाएंगे।
परिवहन आयुक्त रजनीश गुप्ता ने बताया कि पब्लिक वाहन (बस, टैंपो, ऑटो, टैक्सी) में खासतौर पर महिलाओं के साथ होने वाले अपराध को रोकने के लिए वाहन परमिट प्रक्रिया को कठिन बनाया जा रहा है। इसमें पब्लिक वाहन के परमिट के लिए नई शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
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प्रस्ताव की प्रमुख शर्त यह कि पुलिस जांच में पब्लिक वाहन का ड्राइवर एवं कंडक्टर अगर अपराध में लिप्त या फिर उसका अतीत आपराधिक पृष्ठभूमि का पाया गया तो सबसे पहले वाहन का परमिट निरस्त किया जाएगा।
मोटर वाहन नियमावली में संशोधन का यह प्रस्ताव प्रमुख सचिव (परिवहन) बीएस भुल्लर को भेजा गया है।
परिवहन आयुक्त ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव उमाशंकर मिश्र के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी ने तैयार किया है। कमेटी में जमशेद सिद्दीकी एवं गंगाफल शामिल थे।
मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। कमेटी ने अधिनियम की पांच-छह धाराओं में संशोधन की सिफारिश की है। इस संशोधन के बाद मोटर वाहन अधिनियम और प्रभावी हो जाएगा।