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नगर निगम में बजट की 40 फीसदी रकम कमीशन में बंट जाती, सड़कें खस्ताहाल

Mon, 18 Mar 2019 01:01 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ - फोटो : self
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बनते ही सड़कें टूट रही हैं, टाइल्स उखड़ रही हैं। एक ओर लाखों की लागत से सड़क बनती है और कुछ महीने बाद ही उसकी परत उखड़ने लगती है। जानकार इसकी मुख्य वजह कमीशनबाजी को मानते हैं। जानकार बताते हैं कि फाइल बनते ही नगर निगम में कमीशन का खेल शुरू हो जाता है।
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इसकी शुरुआत काम का एस्टीमेट बनाने वाले सुपरवाइजर से होती है और लेखा विभाग में भुगतान होने तक  चलती है। इससे  विकास कार्यों केलिए पास हुए बजट की 37 प्रतिशत राशि कमीशन में बंट जाती है।

काम में फायदा और जल्दी भुगतान के कारण यह आंकड़ा 40 प्रतिशत तक  जाता है। सूत्र बताते हैं कि एक-दो नहीं बल्कि नगर निगम में छोटों से लेकर बड़ों तक के रेट तय हैं। ठेकेदार भी उस हिसाब से सबकी दर पर चढ़ावा चलाते चलते हैं।
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एक ठेकेदार ने कहा कि बिना कमीशन लिए तो किसी फाइल को पास तक नहीं किया जाता भुगतान की बात तो अलग। इंजीनियर और अफसर कमीशन पहले ले लेते हैं और काम बाद में करते हैं। मजेदार बात है कि कभी कोई ठेकेदार इसका विरोध नहीं करता।

कमीशन बढ़ाकर भरते हैं अपनी जेब
फिक्स कमीशन के अलावा लेखा विभाग में भुगतान को लेकर कमीशन का रेट बदल जाता है। वैसे तो लेखा विभाग में पांच से दस प्रतिशत कमीशन भुगतान पर चलता है मगर जब बजट का संकट होता है तो लेखा विभाग के कमीशन का रेट ऊपर चला जाता है। जानकार बताते हैं कि फिक्स कमीशन के अलावा दस से पंद्रह प्रतिशत तक भुगतान के लिए ठेकेदार एडवांस में चढ़ावा चढ़ाते हैं। उसके बाद भी भुगतान के लिए उनको 15 से 20 दिन का इंतजार करना होता है।  

साठगांठ : बजट में ही शामिल होती है कमीशन की रकम भी
37 प्रतिशत कमीशन देना और काम भी कराना? यह सवाल अक्सर लोगों को परेशान करता है। लोग कहते हैं कि जब इतना अधिक कमीशन बंट जाता है तो काम कैसे होता होगा। इस पर एक ठेकेदार ने ही बताया किसी भी काम का एस्टीमेट कमीशन को ध्यान में ही रखकर बनाया जाता है। इंजीनियर से मिलीभगत के चलते काम का स्टीमेट पहले से ही अधिक बनाया जाता है ताकि इंजीनियर को कमीशन अधिक मिले और ठेकेदार की भी अच्छी कमाई हो।

गुणवत्तापूर्ण काम के लिए हर स्तर पर नजर रखी जा रही
महापौर संयुक्ता भाटिया ने बताया कि काम गुणवत्तापरक हों, इसके लिए अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह मौके पर जाकर जांच करें। मैं खुद मौके पर जाती हूं।  हर स्तर पर नजर रखी जा रही है। जहां पर काम खराब मिलता है, वहां पर कार्यवाही की जाती है। यदि ठेकेदार कहते हैं कि कमीशन के कारण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तो वह कमीशनबाजी बंद करें।
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