भले ही यूपी सरकार के बड़बोले मंत्री प्रदेश को देश की अव्वल अर्थव्यवस्था बनाने का दम भर रहे हों, लेकिन असलियत इससे काफी जुदा है।
यह खबर इस बात की बानगी भर है कि यहां हर साल कैसे अरबों रुपये के फंड बर्बाद हो जाते हैं। कभी मंत्रियों और अफसरों की सांठगांठ में, तो कभी कागजी खेल में।
सही मायने में कहा जाए तो यूपी में हर काम राम भरोसे अंदाज में किया जा रहा है। फिर चाहे वो सरकार की कार्यशैली हो या फिर प्रशासन की।
मामला लखनऊ के करीबी जिले बलरामपुर का है। यहां सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग बजट के 1.20 अरब रुपये भी खर्च नहीं कर पाया।
चालू वित्तीय वर्ष में इस धनराशि से जिले की करीब 60 सड़कों का निर्माण व मरम्मत होनी है, लेकिन अधिकांश सड़कों पर केवल पैचिंग काम करवा कर कार्य की इतिश्री कर ली गई है।
हाल ये है कि 60 सड़कों में एक भी नई सड़क का निर्माण नहीं करवाया गया है। लोक निर्माण विभाग की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
21 लाख आबादी इन्हें खराब सड़कों पर चलने के लिए मजबूर है। इसे लेकर लोगों में काफी आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 2012-13 में जनपद की करीब 60 सड़कों के निर्माण व मरम्मत के लिए 1.20 अरब रुपये का बजट लोक निर्माण प्रांतीय खंड को आवंटित किया था।
यदि समय रहते लोक निर्माण विभाग इस धनराशि का उपयोग कर लेता तो शासन स्तर से सड़कों के निर्माण व मरम्मत के लिए और धनराशि मिल जाती, जिससे जिलेवासियों को बेहतर सड़कों पर चलने का सपना पूरा हो जाता।
लोक निर्माण विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक ये पूरी धनराशि डंप है। हालात ये हैं कि कुछ सड़कों पर केवल पैचिंग वर्क कराकर काम की इतिश्री कर ली गई है।
यहां तक कि 60 सड़कों में एक भी नई सड़क का निर्माण अब तक नहीं किया गया है। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में चार के सापेक्ष तीन एई व 10 के सापेक्ष आठ जेई काम कर रहे हैं फिर भी काम नहीं हो रहा है।
बरसात के कारण काम में हुई देर
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड बलरामपुर के अधिशासी अभियंता एमके सिंह ने कहा कि सभी कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। बांड गठन की प्रक्रिया चल रही है। चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न मदों में प्राप्त बजट से काम पूरा करा लिया जाएगा। बरसात के चलते काम देर से शुरू हुआ था।