राजधानी लखनऊ में आउटर रिंग रोड की तर्ज पर 'रिंग रेल' बनाई जाएगी। शहर की परिधि में आने वाले 10 छोटे स्टेशनों को विकसित किया जाएगा। इन स्टेशनों पर चारबाग व लखनऊ जंक्शन की ट्रेनों को शिफ्ट किया जाएगा। इससे चारबाग और लखनऊ जंक्शन पर आ रहे ट्रैफिक दबाव में 80 फीसदी तक कमी आएगी। चारबाग में जाम की समस्या भी कम होगी। इस पर करीब 4500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जनवरी से इसके लिए सर्वे शुरू होगा।
उतरेटिया, मल्हौर, ट्रांसपोर्टनगर, मानकनगर, आलमनगर, ऐशबाग, सिटी स्टेशन, डालीगंज, बादशाहनगर और गोमतीनगर स्टेशन रिंग रेल के अंग बनेंगे। इन्हें शहर के यातायात के लिहाज से विकसित किया जाएगा। इसके लिए पूर्वोत्तर रेलवे के अफसरों से भी विचार-विमर्श होगा, ताकि रिंग रेल पर पड़ने वाले उनके स्टेशनों का भी विकास हो सके।
उतरेटिया से ट्रांसपोर्टनगर के बीच ट्रैक का दोहरीकरण हो चुका है। यहां स्पीड बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटे तक की जाएगी। स्पीड बढ़ाने के साथ-साथ चारबाग स्टेशन की 29 नॉन प्रीमियम ट्रेनों को उतरेटिया के रास्ते बाईपास कर ट्रांसपोर्टनगर ले जाया जाएगा। इससे चारबाग में ट्रेनों व यात्रियों का लोड कम हो जाएगा। वहीं, ऐशबाग से मानकनगर के बीच बने बाईपास को और उन्नत बनाया जाएगा।
लखनऊ से कानपुर के बीच फोरलेन के प्रोजेक्ट पर भी इसके तहत काम किया जाएगा। इसके लिए उन्नाव तक ट्रैक को फोरलेन बनाया जाएगा। इसके आगे बाईपास लाइन बनाई जाएगी, जिससे ट्रेनों व मालगाड़ियों को कानपुर नहीं ले जाना पड़ेगा। उन्नाव के रास्ते बाईपास से होते हुए ट्रेनें दिल्ली रूट पर निकल जाएंगी।
रिंग रेल पर आने वाले स्टेशनों पर यात्रियों की पहुंच सुगम बनाने के लिए सिटी ट्रांसपोर्ट की भी मदद ली जाएगी। ऑटो, टैंपो, सिटी बसें, मेट्रो आदि की पहुंच इन स्टेशनों तक होने से यात्रियों की आवाजाही आसान हो जाएगी। इसके लिए रेलवे अफसर सिटी ट्रांसपोर्ट व परिवहन विभाग अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
रिंग रोड की तर्ज पर लखनऊ में रिंग रेल बनाने की योजना है। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। महाप्रबंधक ने प्रस्ताव को सहमति दे दी है। जल्द सर्वे किया जाएगा। इससे लखनऊ में रेलवे ट्रैफिक सुगम व आसान हो जाएगा और यात्रियों को राहत होगी। -रजनीश श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, उत्तर रेलवे